
MADHUBANI:- मनाई गई लोक आस्था और परंपरा का प्रतीक सतुआनी पर्व, लोगों ने किया सत्तू का सेवन
मधुबनी- 14 अप्रैल। आज लोक आस्था और परंपरा का प्रतीक सतुआनी पर्व उत्साह से मनाई गई। शहर और आसपास के क्षेत्रों में घर व मंदिरों पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजा में आम के टिकौले, जौ का आटा, जो, चना सत्तू, गूड आदि वस्तुएं अर्पित कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति की कामना की गई। यह परंपरा परिवार और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। पर्व की खास पहचान चने के सत्तू के साथ नमक, मिर्च, कच्चे आम की चटनी और प्याज का सेवन किया गया। ज्योतिषाचार्य पं मोहित नारायण मिश्र ने कहा कि सत्तू सेवन शरीर को ठंडक देने वाला और ऊर्जा प्रदान करने वाला आहार माना जाता है। भीषण गर्मी में सत्तू का सेवन लू से बचाव में सहायक होता है।
मैथिल विकास प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष मोद नारायण झा ने कहा कि किसान इस पर्व को नई ऋतु और कृषि चक्र की शुरुआत के रूप में भी देखते है। पर्व गर्मी की शुरुआत के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का संदेश देता है। प्राकृतिक जीवनशैली और पारंपरिक खानपान को बढ़ावा देता है। मधुबनी सहित मिथिला क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह पर्व ऋतु परिवर्तन के साथ सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि वर्तमान समय में श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के साथ सतुआनी पर्व को नई पहचान देने की कोशिश हो रही है। सत्तू, जौ, बाजरा और रागी जैसे अनाज को पोषण और स्वास्थ्य से जोड़कर पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जा रहा है।पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और किसानों की आय को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। सतुआनी पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें नई पीढ़ी से जोड़ना और आधुनिक संदर्भों में संरक्षित करना आवश्यक है। यह पर्व परंपरा, प्रकृति और पोषण के समन्वय का अद्भुत उदाहरण है।



