
बिहार में राजस्व संग्रहण में रिकॉर्ड उपलब्धि, लक्ष्य से अधिक 8,403 करोड़ रुपये की वसूली
पटना- 01 अप्रैल। बिहार के मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में राजस्व संग्रहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। विभाग ने निर्धारित 8,250 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 8,403.46 करोड़ रुपये की वसूली करते हुए 101.86 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई जिलों और निबंधन कार्यालयों ने लक्ष्य से अधिक राजस्व संग्रह कर बेहतर प्रदर्शन किया है। सर्वाधिक राजस्व संग्रह करने वाले जिलों में पटना पहले स्थान पर रहा। यहां 1,28,367 दस्तावेजों का निबंधन हुआ और 1,361.38 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,506.15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इसके बाद अरवल में 6,814 दस्तावेजों के साथ 36.65 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 39.75 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। औरंगाबाद में 30,307 दस्तावेजों के जरिए 178.23 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 191.38 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। बांका में 25,130 दस्तावेजों से 86.39 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 91.81 करोड़ रुपये की वसूली हुई। वहीं, शिवहर में 10,451 दस्तावेजों के माध्यम से 35.96 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 37.14 करोड़ रुपये राजस्व संग्रह किया गया।
निबंधन कार्यालयों में दानापुर कार्यालय ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। यहां 12,633 दस्तावेजों के निबंधन के साथ 190.68 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 255.72 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय प्राप्ति दर्ज की गई। रजौली कार्यालय में 9,562 दस्तावेजों के जरिए 26.57 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 34.54 करोड़ रुपये की वसूली हुई। पटना सिटी कार्यालय ने 7,022 दस्तावेजों के माध्यम से 89.58 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 106.53 करोड़ रुपये अर्जित किए।
विक्रम कार्यालय में 10,032 दस्तावेजों के जरिए 50.69 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 59.80 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। डेहरी ऑन सोन कार्यालय में 6,678 दस्तावेजों के साथ 37.78 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 44.34 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हुआ।
हालांकि, कुछ जिलों में अपेक्षाकृत कम राजस्व संग्रह दर्ज किया गया। इनमें मुजफ्फरपुर (87.78 प्रतिशत), मधुबनी (87.49 प्रतिशत), समस्तीपुर (86.53 प्रतिशत), बेतिया (85.53 प्रतिशत) तथा मधेपुरा (81.52 प्रतिशत) शामिल हैं।
विभाग का कहना है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में कम प्रदर्शन करने वाले जिलों पर विशेष ध्यान देकर राजस्व संग्रहण में और सुधार किया जाएगा।



