
राजधानी एक्सप्रेस की टक्कर से 2 हाथियों की मौत
मोरीगांव- 01 दिसम्बर। जिला में नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से दो जंगली हाथियों की मौत हो गई। यह घटना जागीरोड स्टेशन से लगभग 07 किमी दूर बाराहू के पास हुई। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (पूसीरे) की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी गुनीत कौर ने बुधवार को बताया कि गुवाहाटी से डिब्रूगढ़ के लिए रवाना हुई 12424 राजधानी एक्सप्रेस के ट्रेन चालक ने बीती रात करीब 10 बजे सूचना दी कि परिचालन के दौरान ट्रेन से दो हाथी टकराए हैं। जिस खंड पर यह घटना हुई, वह वन विभाग द्वारा घोषित एलिफेंट कॉरिडोर नहीं है।
घटना के बाद रेलवे ने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग ने बताया कि आम तौर पर इस क्षेत्र में हाथियों का आना-जाना नहीं था और हाल के दिनों में इस क्षेत्र में ट्रेन से टकराने या उनके देखे जाने की ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। हालांकि, वर्तमान में इस क्षेत्र में धान की खेती की जा रही है, इसलिए हो सकता है कि हाथी फसल को खाने के लिए यहां पहुंचे हो।
सभी टक्कर मामलों को दुर्घटना की तरह माना जाता है, क्योंकि यह न केवल वन्य जीव का नुकसान है, बल्कि ट्रेन में यात्रा करने वाले सैकड़ों यात्रियों के जीवन को खतरे में डालता है। पूर्व में, पूसीरे ने ट्रेन-हाथी की टक्कर और टकराव से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं। सभी ट्रेन चालकों और ट्रैकमैन को अधिसूचित खंडों में सभी स्थायी और अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन करने की सलाह दी गई है। संवेदनशील स्थानों के लेवल क्रॉसिंग गेटों पर मधुमक्खी ध्वनि वाला बजर लगाना हाथियों को भगाने का एक प्रभावी तरीका साबित हुआ है। पैंट्री कार के कर्मचारियों के साथ-साथ ट्रेन यात्रियों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे किसी भी खाने योग्य या बचे हुए खाद्य पदार्थ को रेलवे ट्रैक पर या उसके पास न फेंके, ताकि हाथी या कोई अन्य जानवर ट्रैक की ओर आकर्षित न हो। वन विभाग द्वारा निर्धारित स्थानों पर ट्रेन चालक को पूर्व चेतावनी देने के लिए सभी चिह्नित एलिफेंट कॉरिडोर पर साइनेज बोर्ड्स लगाए गए हैं। ट्रेन चालकों की बेहतर दृश्यता के लिए रेलवे ट्रैक के दोनों किनारों पर झाड़ियों की सफाई नियमित तौर पर की जाती है। वन विभाग के साथ लगातार समन्वय और संचार रखा जाता है।
बीती रात की घटना के बाद पूसीरे ने सक्रिय रूप से घटना की विस्तृत जांच करने एवं ट्रेन की आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने का निर्णय लिया है तथा अधिसूचित एलिफेंट कॉरिडोर का पुनर्मूल्यांकन भी वन विभाग के समन्वय से करने का प्रयास किया जा रहा है।



