भारत

भ्रूण हत्या नैतिक अपराध, कानून के परिणामों की जांच होः जमात-ए-इस्लामी

नई दिल्ली- 01 अक्टूबर। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के जरिए हाल में गर्भपात से सम्बंधित दिए गए फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भ्रूण हत्या नैतिक अपराध है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित अपने मासिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जमात की महिला विंग की सचिव मेहरुन्निसा ने कहा है कि गर्भपात बुनियादी तौर पर एक नैतिक समस्या है। गर्भ में एक इंसानी जिंदगी बसती है। हमें यह हक नहीं है कि हम इस जिंदगी का अंत कर दें।

मेहरुन्निसा ने कहा कि भ्रूण हत्या मानव अधिकारों का भी उल्लंघन है। अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से जान छुड़ाने के लिए और कुछ परिस्थितियों में अपनी या किसी और की नैतिक गिरावट को छिपाने के लिए गर्भपात को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इससे महिलाओं की भावनाओं और शारीरिक स्वास्थ्य को दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता है। हमें इस कानून के समाज पर पड़ने वाले परिणामों की जांच करनी चाहिए। महिलाओं का शोषण कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि पुरुष अब अपने गलत कामों के परिणाम से नहीं डरेंगे। महिलाओं पर बढ़ते जुल्म के बारे में पूछे गए प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे समाज में महिलाओं को उचित जगह नहीं दी जाती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से पता चलता है कि 2021 में महिलाओं के प्रति अपराधों में 4.2 से अधिक की घटनाएं सामने आई हैं। महिलाओं के प्रति नजरिए में बदलाव लाकर समाज में सुधार लाने की अत्यंत जरूरत है।

संवाददाता सम्मेलन को जमात के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत एक बहु धार्मिक, बहुभाषी, बहु सांस्कृतिक देश है। इसका संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांत पर आधारित है। स्थाई सिद्धांतों की मांग है कि हम भारत के लोग शांति और सद्भाव से एक साथ मिलजुल कर रहें। आज कुछ ताकतें नफरत और बंटवारे के नाम पर सत्ता मांग रही हैं। इसलिए शांति और प्रगति के लिए खतरा बन रही हैं। समाज को एक दूसरे के बीच आपसी सहिष्णुता और विश्वास विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जमात का मत बिल्कुल स्पष्ट है। संगठनों पर पाबंदी लगाने की मानसिकता लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। अगर किसी संगठन पर कोई आरोप है तो इसका फैसला अदालत में होना चाहिए। ज्ञानवापी मस्जिद पर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में है और हम कानूनी कार्रवाई पर विश्वास रखते हैं।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button