क्राइम

CYBER CRIMES में प्रयोग होने वाले 9 हजार फर्जी सिम ब्लॉक

भोपाल- 21 मार्च। मध्यप्रदेश राज्य सायबर पुलिस द्वारा सायबर अपराधियों के विरूद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी कड़ी में सायबर पुलिस जोन ग्वालियर ने सायबर ठगी के एक साधारण से दिखने वाले प्रकरण में गहन तकनीकी विश्ले षण करते हुए न केवल हजारों संदिग्ध मोबाईल नंबरों का पता लगाया ए बल्कि लगभग आठ हज़ार संदिग्ध मोबाईल नंबरों को ब्लाक कराने में सफलता अर्जित की है

मध्यप्रदेश राज्य सायबर पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने फेसबुक पर कार का विज्ञापन देखकर कार खरीदने के लिए एक लाख 75 हजार रूपये जमा करा लिए जाने और इस प्रकार ठगी हो जाने की शिकायत वर्ष 2020 में सायबर पुलिस जोन ग्वालियर में की थी। जिस पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था। विवेचना के दौरान यह पाया गया कि आरोपी ने फरियादी से मोबाईल पर बात करने के लिए जिस मोबाईल का प्रयोग किया था वह नंबर किसी नागरिक के पहचान दस्तावेजों का प्रयोग कर फर्जी तरीके से जारी किया गया था। विवेचना में फर्जी सिम जारी करने की प्रक्रिया में संलिप्त आठ आरोपियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की गयी है। इसके अलावा विवेचना टीम ने आरोपीगण की तलाश में एकत्र किये गए डाटा के विश्लेषण पर पाया कि प्रकरण में प्रयुक्त मोबाईल नंबरों के उपयोगकर्ताओं ने विगत एक वर्ष की अवधि में लगभग 20 हजार मोबाईल नंबरों का प्रयोग किया है। इन नंबरों को संदिग्ध मानते हुए इन्हें जारी करने वाली विभिन्न टेलीकॉम सर्विस प्रोवाईडर कंपनियो वोडाफ़ोन आईडिया, एयरटेल, बीएसएनएल को इन नम्बरों के रिवेरिफिकेशन के लिए कहा गया था। जिसके बाद टेलीकॉम सर्विस प्रोवाईडर कंपनियों द्वारा तत्परता से कार्यवाही करते हुए 7948 सिमों को बंद कर दिया।

इन सिमों का ब्लाक किया जाना इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रकार की फेक सिमों का प्रयोग करके ही सायबर अपराधियों द्वारा देश के नागरिको के साथ सायबर अपराध विशेषकर ठगी की जाती है। परन्तु ठगी की शिकायत जांच पर पुलिस असली सायबर अपराधियों तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि ये सिम निर्दोष नागरिकों के आई०डी०का प्रयोग कर प्राप्त की गयी होती है। इन सिमों के ब्लाक होने के बाद इन सिमों का प्रयोग सायबर अपराध में करना संभव नहीं हो पायेगा।

इस प्रकार ठगी के एक सामान्य प्रकरण में अनुसंधान और संदिग्ध आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के साथ-साथ डाटा कलेक्सन तथा सूक्ष्म गहन विश्लेषण से हजारों की संख्या में संदिग्ध मोबाईल नंबरों का पता लगाने और लगभग आठ हजार फर्जी सिम नंबर ब्लॉक कराये जाने का यह संभवत पूरे देश का अपनी तरह का पहला मामला है।

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