
मोदी सरकार ने बेच दी उत्तराखंड की आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयां बनाने वाली कंपनी : मीना देवी कुशवाहा
मधुबनी – 18 जून। केन्द्र की एनडीए सरकार नई कंपनी खोलने की बजाय मुनाफे वाली कंपनी बेच रही है। फायदे में चल रही सरकारी कंपनियों को भी निजी हाथों में सौंपने की कड़ी में उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित भारतीय औषधि फार्मास्यूटिकल निगम लिमिटेड (IMPCL) शामिल हो गया।भारतीय औषधि फार्मास्यूटिकल निगम लिमिटेड का निजीकरण किए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस पार्टी मधुबनी पश्चिमी अध्यक्ष मीना देवी कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार ने आयुष मंत्रालय के अधीन भारतीय औषधि फार्मास्यूटिकल निगम लिमिटेड (IMPCL) को बेच दिया है।
आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयां बनाने वाली कंपनी IMPCL को स्काईमैप फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने खरीद लिया है। स्काईमैप फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ इस कंपनी का सौदा 121.01 करोड़ रुपये में किया गया है। सरकार ने अपने 100 फीसदी शेयर बेच दिए हैं। कंपनी का प्रबंधन और नियंत्रण अब स्काईमैप के पास है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार फायदे में चल रही इस सरकारी कंपनी को अपने ‘चुनिंदा पूंजीपति मित्रों’ को लाभ पहुंचाने के लिए कौड़ियों के भाव बेच रही है। लगभग 145 करोड़ वाली इस कंपनी को सरकार ने 121 करोड़ में निजी हाथों (स्काईमैप फार्मास्यूटिकल्स) को बेच दिया है। यह एक बड़ा घोटाला है।
मुनाफे में चल रही कंपनी को बेचने के पीछे असली मंशा क्या है। केन्द्र सरकार का यह कदम सरकार के आयुर्वेद और आयुष को बढ़ावा देने के दावों की पोल खोलता है। कंपनी के करीब 500 कर्मचारियों और जड़ी-बूटियां उपजाने वाले हजारों छोटे किसानों के हितों की अनदेखी की गई है। केन्द्र सरकार देश की मूल्यवान संपत्तियों को बेचकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रही है। इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का निजीकरण से इसके कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों की नौकरियों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित IMPCL की स्थापना साल 1978 में आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति के मकसद से की गई थी। केन्द्र में एनडीए आने के बाद साल 2017 में ही आयुष मंत्रालय ने कंपनी को बेचने की तैयारी शुरु कर दिया था। उन्होंने बताया कि IMPCL का प्रदर्शन साल 1983 से अब तक, लगातार मुनाफे में होने के बाद भी सरकार बेच दी। जिसका उत्पाद देश-विदेश में बिक रहे थे।



