
दीपावली पर होगी गणेश-लक्ष्मी की पूजा, स्थिर लग्न में पूजन से होगा स्थायी वास: पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 07 नवंबर। दीपावली पर रविवार, 08 नवंबर को भगवान गणेश-लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाएगी। शास्त्रों में वर्णित तथ्यों के अनुसार इस बार कार्तिक कृष्ण अमावस्या प्रदोष काल में पड़ रही है, इसलिए यही दिन पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि इस वर्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। चूंकि 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या का संयोग बन रहा है, इसलिए मुख्य दीपावली और लक्ष्मी-गणेश पूजन उसी दिन संपन्न होगा।
पं. झा के अनुसार गृहस्थों के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) के संयोग में शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि ‘स्थिर लग्ने लक्ष्मीपूजनं शुभम्’ अर्थात स्थिर लग्न में की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है। वृषभ लग्न स्थिर लग्न है, इसलिए इसी में पूजा करना श्रेष्ठ है। पं. झा ने स्पष्ट किया कि अलग अलग शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग को ही आधार मानें।
पं. ऋषिनाथ झा ने शास्त्रीय तथ्य बताते हुए कहा कि लक्ष्मी चंचला हैं, गणेश स्थिरता के प्रतीक हैं। शास्त्रों के अनुसार प्रथम पूज्य गणेश के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता। इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा की जाती है, ताकि धन के साथ विवेक, बुद्धि और विघ्नों का नाश भी हो।
लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाहिने भाग में स्थापित किया जाता है। शास्त्रों में विधान है कि चौकी पर अक्षत की ढेरी बनाकर तांबे या पीतल का कलश जल भरकर स्थापित करें और उस पर आम के पत्ते व नारियल रखें।
सुबह घर और पूजा स्थल की विधिवत साफ-सफाई करें, गंगाजल छिड़कें। शाम को उत्तर या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं। उस पर गणेश को लक्ष्मी के बाईं ओर स्थापित करें। हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर संकल्प लें। पहले गणेश को तिलक, दुर्वा, मोदक और पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात माता लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमलगट्टा, लाल गुलाब, सिंदूर, फल, मिठाई और खीर-बताशे अर्पित करें। सरसों के तेल अथवा गाय के घी का चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें। अंत में गणेश और लक्ष्मी की आरती कर भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
पं. ऋषिनाथ झा ने कहा कि पूजा केवल दिखावा न हो। दीपावली पर घर के मुख्य द्वार, तुलसी और मंदिर में दीपक जरूर जलाएं। गरीबों को मिठाई, वस्त्र दान करें। यही सच्ची लक्ष्मी पूजा है। आतिशबाजी में सावधानी बरतें, ताकि पर्व आनंद के साथ सुरक्षित भी रहे।



