
महाकवि विद्यापति मैथिली साहित्य एवं भारतीय भक्ति संगीत परंपरा के अमूल्य धरोहर, उनके गीतों से गूंजा आम्रपाली केंद्र
मधुबनी, 07 नवंबर। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, मधुबनी के तत्वावधान में जिला परिषद परिसर स्थित आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र में 04 से 07 नवंबर तक आयोजित चार दिवसीय महाकवि विद्यापति गीत कार्यशाला का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक पंडित राधा मोहन मिश्र द्वारा प्रशिक्षुओं को विद्यापति पदावली के गायन, भावार्थ, शुद्ध उच्चारण, राग, स्वर, लय एवं ताल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह में प्रो. उदय नारायण तिवारी, प्रख्यात तबला वादक पंडित रवि शंकर मिश्र तथा दूरदर्शन कलाकार पंडित काशी नाथ झा उपस्थित रहे। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार द्वारा सभी अतिथियों को मिथिला की परंपरा के अनुरूप पाग एवं दुपट्टा प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा कि महाकवि विद्यापति मैथिली साहित्य एवं भारतीय भक्ति संगीत परंपरा के अमूल्य धरोहर हैं। उनकी पदावली में भक्ति, प्रेम एवं अध्यात्म का अद्भुत समन्वय है। इस कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को विद्यापति संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ना एवं इसके संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति जागरूक करना है।
प्रो. उदय नारायण तिवारी ने विद्यापति के साहित्यिक व्यक्तित्व, मैथिली भाषा एवं उनकी पदावली की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। पंडित रवि शंकर मिश्र ने विद्यापति संगीत के शास्त्रीय एवं तालात्मक पक्ष तथा लय और ताल के महत्व को समझाया। दूरदर्शन कलाकार पंडित काशी नाथ झा ने विद्यापति गीतों की पारंपरिक गायन शैली एवं शुद्ध उच्चारण पर अपने विचार रखे।
समारोह में प्रशिक्षुओं द्वारा विद्यापति पदावली पर आधारित सुंदर प्रस्तुतियां दी गईं। भैरवी समूह ने ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि’ प्रस्तुत किया। मंदाकिनी समूह ने ‘सुनु सुनु रसिया’ गीत प्रस्तुत किया। उगना समूह ने ‘नंदक नंद कदम तरु बैसल’ प्रस्तुत किया। विद्यापति समूह ने ‘गे माई हम रहब’ गीत प्रस्तुत किया।
50 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित मूल्यांकन परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया गया। प्रथम: आनंद कुमार ठाकुर एवं रूबी कुमारी (संयुक्त), द्वितीय: श्याम सुंदर मिश्रा, कुमारी स्मृतिलता एवं पंखुड़ी कुमारी (संयुक्त), तृतीय: कृतिवाला कुमारी, मंजरी मिश्रा, पंकज कुमार एवं कृति कुमारी (संयुक्त) सभी प्रशिक्षुओं को सहभागिता प्रमाण-पत्र दिया गया। मुख्य प्रशिक्षक पंडित राधा मोहन मिश्र को सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में पं. राधा मोहन मिश्र एवं पं. विश्वंभर मिश्रा द्वारा ‘उगना रे मोर कतए गेलाह’ की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन शशि चौरसिया ने किया।



