
गोवर्धन पूजा प्रकृति और गौ-सेवा का प्रतीक: ज्योतिषाचार्य पं. मोहित नारायण मिश्र
मधुबनी- 02 नवंबर। गोवर्धन पूजा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. मोहित नारायण मिश्र ने बताया कि शास्त्रों में इस पर्व का विशेष महत्व वर्णित है।
पं. मिश्र ने बताया कि भागवत पुराण, विष्णु पुराण और गिरिराज माहात्म्य के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़ने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिन-रात तक धारण किया था। तभी से यह पर्व प्रकृति की पूजा के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गोवर्धन पर्वत को भगवान कृष्ण का साक्षात स्वरूप माना गया है। इस दिन गोवर्धन पर्वत, गौ माता और अन्न की पूजा करने से मनुष्य को धन-धान्य, सुख-समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अन्नकूट अर्थात अन्न के पहाड़ का भोग लगाने से अन्न की कभी कमी नहीं होती।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस साल 10 नवंबर को प्रातःकाल मुहूर्त में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसकी परिक्रमा और पूजा करना अत्यंत फलदायी रहेगा। गाय-बैल की पूजा से कर्ज और दरिद्रता दूर होती है।



