
फैसला आपका, असर ग्लोबल साउथ पर, ये नहीं कह सकते कि इरादा नहीं था’, जयशंकर ने न्यूयॉर्क में दुनिया को दिया संदेश
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क- 30 सितंबर। दुनिया में जारी युद्धों के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि बड़े देश अपने फैसले लेते समय ये नहीं कह सकते कि उनका उद्देश्य दूसरों के लिए मुश्किल पैदा करना नहीं था। हर देश को अपने फैसलों के वैश्विक असर को समझना होगा। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध और ईरान-खाड़ी संघर्ष ने ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है।
उन्होंने 3 बड़े संकट गिनाए-
1. ऊर्जा संकट: तेल बाजार पहले से दबाव में है, ऊपर से ऊर्जा आपूर्ति की राजनीति ने स्थिति और जटिल कर दी है। बाजार को इस समय स्थिरता की जरूरत है, कीमतों पर दबाव नहीं।
2. खाद्य और उर्वरक संकट: काला सागर क्षेत्र से अनाज निर्यात बाधित हो रहा है। रूस और मध्य पूर्व से उर्वरक आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे कमी की आशंका है। अल नीनो से खाद्य संकट और बढ़ सकता है।
3. वित्तीय संकट: संघर्ष के समय पूंजी सुरक्षित बाजारों की ओर भागती है और ग्लोबल साउथ से निकलती है, जिससे इन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
जयशंकर ने कहा कि कोई भी देश अःइतना आत्मकेंद्रित नहीं हो सकता कि वह अपनी ही दुनिया में फैसले ले। नीति-निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे आकलन करें कि उनके निर्णय का दूसरे देशों पर क्या असर पड़ेगा।
उन्होंने साफ कहा कि तेल की सुरक्षा और उसकी राजनीति एक-दूसरे को प्रभावित कर रही हैं और इसका असर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है।



