
माता सीता ही मूल प्रकृति देवी, उन्हीं से सभी शक्तियों का प्रादुर्भाव : गोविन्दजी व्यास
मधुबनी- 25 अप्रैल। गोविन्द जीव सेवा संस्थान के तत्वावधान में रहिका प्रखंड के लखनपट्टी गांव स्थित जगत जननी मां जानकी का प्रकट्योत्सव मनाया गया। सुबह में बाइक सवारों द्वारा क्षेत्र में शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा वाचस्पति डीह से खर्रा, लखनपट्टी, सुंदरपुरभट्ठी, अकाशपुरा, नीमा, बेलाम,शिवदत्तपुर, चौरी, दरहपुरा, समौल गांव होते हुए सभा स्थल पर पहुंची।

पं. हरिशंकर झा, पंं. प्रकाश झा के संयुक्त वैदिक मंगलाचरण एवं शशांक शुशांत के मंत्र के संग पूर्व विधान पार्षद सुमन महासेठ, प्रकाश चन्द्र झा, प्रफुल्ल झा, मिहिर झा महादेव, महंत रत्नेश्वर दास उर्फ बब्बू सिंह, साजन सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोविन्द जीव सेवा संस्थान के संचालक राघवाचार्य नें कहा कि पुराणों में मिथिला क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठता का वर्णन है। उसका आधार मां जानकी ही हैं। यह अलौकिक क्षेत्र है जहां भूमि से जगदम्बा प्रकट हुई हैं। डाॅ. श्याम सुंदर चौधरी ने स्वरचित मिथिला वर्णन काव्य पाठ करते हुए कहा कि मिथिलावासियों को जय जानकी का नारा बुलंद करना चाहिए। पूर्व विधान पार्षद सुमन महासेठ ने कहा कि माता सीता तो सबकी हैं। उनका प्राकट्य स्थल मिथिला है, यह हमारा सौभाग्य है। इसे सामाजिक सरोकार से जोड़कर घर-घर में व्यापक रुप से मनाना चाहिए। गोविन्दजी ‘व्यास’ नें कहा माता सीता ही मूल प्रकृति देवी हैं, उन्हीं से सभी शक्तियों का प्रादुर्भाव होता है, मिथिला की महत्ता का केन्द्र भी वही हैं। मिथिलावासियों की परम आराध्या ईष्टदेवी मां मैथिली ही हैं।
कार्यक्रम में पूर्व मुखिया काशीकांत ठाकुर, पूर्व मुखिया मदन सिंह, सरपंच सुधीर सिंह, आचार्य राघवेन्द्र राघव, राजा सिंह, निर्भयकांत झा, विपिन झा, मन्नू झा, धर्मजीत मंडल सुमन जी, डोमू राम, शत्रुघ्न चौधरी, विजय ठाकुर, भगवानजी मिश्र, हरिशचंद्र मिश्र, देवचन्द्र ठाकुर, रामनाथ नटवर, रोहित झा, वेदप्रकाश चौधरी, सुधीर सिंह, बुधन राम, अंजनी मिश्र, कन्हैया मिश्र, अनूप मिश्रा, शिवम् चौधरी, पं. विनेश झा, ललन झा, सुधीर झा, शेखर झा, मंटू झा, अभिनव सिंह, मुकेश झा, शुभम मिश्र, प्रेम कुमार झा, आयुष कुमार झा, आदित्य कुमार मिश्रा, हिमांशु ठाकुर, श्यामलाल राम, मिश्री सदाय, शशांक सुशांत शेखर सहित अन्य ने हिस्सा लिया।धन्यवाद ज्ञापन आचार्य राघवेन्द्र राघव ने किया।



