
आस्था का सावन: भगवान शिव की सच्ची निष्ठा से की गई प्रार्थना जीवन में लाती चमत्कारिक बदलाव: रामबाबू भारती
मधुबनी- 06 अगस्त। भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है, वहीं, उनका भोलेनाथ नाम दर्शाता है कि भगवान शिव केवल जल चढ़ाने मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं।भगवान शिव का हर एक रूप भक्तों का कल्याण स्वरुप है।सावन मास की महिमा पर चर्चा करते हुए शहर के कामेश्वर नाथ महादेव मंदिर के पुजारी पं. रामबाबू भारती ने कहा कि भगवान शिव का रूप अन्य देवी-देवताओं सै बिल्कुल अलग है। देवाधिदेव के गले में सर्प और रुद्राक्ष की माला और संपूर्ण देह पर भस्म दर्शाता है कि महादेव भोग विलासिता से दूर हैं।
उन्होंने कहा कि मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव योग के सबसे पहले गुरु हैं। योग आंतरिक चेतना को जगाने का एक माध्यम है। स्वस्थ रहने का एक बेहतर मार्ग है। भगवान शिव हर चुनौती के लिए तैयार रहते थे। जब समुद्र मंथन के दौरान विष की उत्पत्ति हुई, तब भगवान शिव ने ही उनका पान किया, ताकि समस्त संसार को उसके प्रकोप से बचाया जा सकता है। जब गंगा माता को नदी के रूप में धरती पर उतारने का उपक्रम हुआ, तब भी भगवान शिव ने ही उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।
उन्होंने कहा कि धरती में गंगा के वेग को वहन करने की क्षमता नहीं थी।अर्द्धनारीश्वर के नाम से पूजित भगवान शिव के इस रूप में आधे हिस्से में पुरुष रुपी शिव का वास है। आधे हिस्से में स्त्री यानी शक्ति का वास है। भगवान शिव की सच्ची निष्ठा से की गई प्रार्थना जीवन में चमत्कारिक बदलाव लाती है।
उन्होंने कहा कि संकट के समय सच्चे मन से ‘हर हर महादेव’ के उदघोष से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होता है। नियमित ध्यान और पूजा से जीवन में सात्विक बदलाव व सुख-शांति की प्राप्ति होती है। महामृत्युंजय मंत्र से अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है।



