
मुंगेर का भीमबांध बनेगा वर्ल्ड क्लास ईको टूरिज्म हब, 54 करोड़ से होगा विकास
पटना- 12 अक्टूबर। राज्य के प्राकृतिक और वन क्षेत्रों को पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। इसमें मुंगेर के भीमबांध को प्रमुख ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार भीमबांध के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। RFP पहले ही सार्वजनिक डोमेन में रखा जा चुका है और अब प्राइवेट पार्टनर के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
पीपीपी और DBFOT मॉडल पर विकास—
विभाग ने बताया कि चयनित ईको टूरिज्म स्थलों के विकास और संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए PPP और DBFOT (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर काम हो रहा है। Bihar Eco-Tourism Development Society (BETDS) के माध्यम से ट्रांजेक्शन एडवाइजर, आर्किटेक्ट कंसल्टेंट और प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (PMU) के चयन की प्रक्रिया भी चल रही है, साथ ही ब्रांडिंग और प्रचार के लिए एजेंसी का चयन भी शुरू किया गया है।
54.35 करोड़ की DPR, क्या-क्या बनेगा—
सरकार ने भीमबांध वन्य जीव अभयारण्य के लिए 54.35 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दी है। यह विकास भीमबांध से चोरमारा होते हुए बेल्टांड तक प्रस्तावित है।
मास्टर प्लान में शामिल सुविधाएं—
फॉरेस्ट एक्सपीरियंस सेंटर, योग ग्राम, वेलनेस और आयुर्वेद सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, ट्री हाउस, ईको-कॉटेज, कैफेटेरिया, रेस्टोरेंट, एंट्रेंस प्लाजा, गर्म जल कुंडों का विकास, हॉट वाटर लेक, बर्ड वॉच टावर, व्यू प्वाइंट, 2 किमी ट्रेकिंग रूट, लैंडस्केपिंग, ऑर्किड और फ्रूट गार्डन।
अन्य स्थलों पर भी फोकस—
भीमबांध के अलावा राजगीर, कैमूर, रोहतास, गया, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सहित अन्य वन और जलाशय क्षेत्रों में भी सुविधाओं के विस्तार की योजना है। राजगीर में ईको-फ्रेंडली कॉटेज और नेचर सफारी में क्लिफ वाक विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विभाग का कहना है कि उद्देश्य प्रकृति संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।



