
जर्मनी से नेपाल लौटे 13वीं से 20वीं सदी के 800 से अधिक ऐतिहासिक दस्तावेज
काठमांडू – 05 अक्टूबर। नेपाल के 13वीं से 20वीं सदी तक के 800 से अधिक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज, जो जर्मन नागरिक जोसेफ पीटर रिंडफ्लाइश के निजी संग्रह में थे, नेपाल के राष्ट्रीय अभिलेखालय को सौंप दिए गए हैं।
राष्ट्रीय अभिलेखालय में आयोजित कार्यक्रम में हीडलबर्ग विश्वविद्यालय की हीडलबर्ग एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज के प्रो. एक्सेल माइकल्स, डॉ. माणिक बज्राचार्य और राजन खेतवाड़ी ने संयुक्त रूप से ये दस्तावेज विदेश मंत्री शिशिर खनाल को सौंपे।
प्रो. एक्सेल माइकल्स, जोसेफ रिंडफ्लाइश के बेटे वाल्टर रिंडफ्लाइश के मित्र हैं। वाल्टर ने अपने पिता के दस्तावेजों को नेपाल वापस पहुंचाने के लिए प्रो. माइकल्स को सौंपा था। इसके बाद प्रो. माइकल्स ने हीडलबर्ग विश्वविद्यालय के माध्यम से इन दस्तावेजों को नेपाल को वापस किया।
इन दस्तावेजों को वापस लाने में जर्मनी स्थित नेपाली दूतावास, हीडलबर्ग विश्वविद्यालय, हीडलबर्ग एकेडमी, सराफ फाउंडेशन और राष्ट्रीय अभिलेखालय ने सहयोग किया।
विदेश मंत्री बोले – सांस्कृतिक संप्रभुता बहाल हुई
विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि इन दस्तावेजों की वापसी से नेपाल की सांस्कृतिक अखंडता और अपनी सभ्यतागत विरासत पर संप्रभु स्वामित्व बहाल हुआ है।
उन्होंने कहा कि हमारी कला, साहित्य, परंपराएं और पवित्र ग्रंथ केवल भौतिक वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवंत आत्मा हैं। हर ऐतिहासिक दस्तावेज की उसकी मूल भूमि में वापसी सांस्कृतिक अधिकारों की बहाली है।
मंत्री खनाल ने दिवंगत जोसेफ पीटर रिंडफ्लाइश की इच्छा को याद किया, जिन्होंने अपने संग्रह के 800 से अधिक दस्तावेज नेपाल लौटाने की इच्छा जताई थी।
संग्रह में क्या है?
विदेश मंत्री ने बताया कि इस संग्रह में प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां, शाही फरमान, अदालती आदेश, संस्कृत ग्रंथ और यात्रा विवरण शामिल हैं। ये नेपाल के राजनीतिक, कानूनी और बौद्धिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
सूची के अनुसार इसमें मल्लकालीन 465 ताड़पत्र पांडुलिपियां, जिन पर लालमोहर लगी है। शाह और राणा काल के 312 कानूनी दस्तावेज और राजकीय कागजात, राणा प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित 18 हस्तलिखित पुस्तकें और यात्रा डायरी, विभिन्न विषयों पर 11 हस्तलिखित पुस्तकें शामिल हैं।
हीडलबर्ग विश्वविद्यालय पुस्तकालय ने इस संग्रह को संरक्षित और सूचीबद्ध किया था। कुछ ताड़पत्र पांडुलिपियां नेपाल के सबसे पुराने दस्तावेजों में से हैं।
विदेश मंत्री ने बताया कि 24 अप्रैल 2026 को प्रो. माइकल्स ने औपचारिक रूप से ये दस्तावेज बर्लिन स्थित नेपाली दूतावास को सौंपे थे।
उन्होंने कहा कि नेपाल और जर्मनी दोनों 1970 की यूनेस्को संधि के पक्षकार हैं, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक संपत्तियों के अवैध आयात-निर्यात को रोकना है। इन दस्तावेजों की वापसी इसी अंतरराष्ट्रीय संधि की भावना का उदाहरण है।



