
MADHUBANI:- भौआड़ा में 200 साल से एक साथ पूजे जाते महामाया स्वरूपिणी मां दुर्गा और बाल गोपाल
मधुबनी- 05 सितंबर। जिला मुख्यालय स्थित भौआड़ा में मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सृष्टि के सबसे बड़े रहस्य भाई और बहन के दिव्य मिलन की कथा है। भौआड़ा में दिनभर महामाया स्वरूपिणी मां दुर्गा की पूजा और महिलाओं द्वारा खोइछा भराई की जाती है। मान्यता है कि बहन की पूजा और आशीर्वाद के बिना भाई का जन्मोत्सव अधूरा है।
बहन महामाया की पूजा के बीच मध्यरात्रि 12 बजे नंद के घर आनंद भयो के जयकारे के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह परंपरा पंडित श्रीकृष्ण मिश्र की जयंती पर पिछले 200 वर्षों से चली आ रही है, उसका सीधा संबंध द्वापर युग की उस रात से है, जब दो अवतार एक साथ हुए थे। महामाया और कृष्ण का संबंध में शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान विष्णु ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया, तो ठीक उसी समय उनकी योगमाया शक्ति ने नंद-यशोदा के घर पुत्री के रूप में अवतार लिया। वासुदेव जी जब आधी रात को कृष्ण को टोकरी में लेकर गोकुल पहुंचे, तो उन्होंने यशोदा के पास सोई हुई उस कन्या महामाया को उठा लिया और कृष्ण को वहां सुला दिया।
वासुदेव उस कन्या को लेकर वापस मथुरा कारागार में आ गए। जब कंस ने उस कन्या को मारने के लिए शिला पर पटका, तो वह कन्या हाथ से छूटकर आकाश में अष्टभुजा दुर्गा के रूप में प्रकट हो गईं और गरज कर बोलीं “अरे मूर्ख कंस, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारने वाला तो गोकुल में पहुंच चुका है।
” भौआड़ा में भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके संपूर्ण वंशजों की पूजा इस बात का प्रतीक है कि कृष्ण केवल देवकी के नहीं, पूरे मानव जाति के उद्धारक हैं। इस ऐतिहासिक महोत्सव के संचालन पुजारी सचिव कुमार मिश्र, पं. अमित कुमार झा, संजीव कुमार मिश्रा, कैलाश चन्द मिश्र, प्रभाव चन्द मिश्र, मनीष कुमार मिश्र, आशीष कुमार मिश्र, श्याम कुमार मिश्र, सतीश कुमार मिश्र, राजकुमार मिश्र सहित मिश्रा परिवार जुटे है।



