विश्व

एक दशक बाद अमेरिका पहुंचे शी जिनपिंग, ट्रंप से एआई के मुद्दे पर हुई विशेष चर्चा, सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

वाशिंगटन- 24 सितंबर। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक दशक से अधिक समय बाद अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान चीन-अमेरिका संबंधों में दोस्ती और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर व्हाइट हाउस पहुंचे शी ने कहा कि उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, दोनों देशों के लोगों के हित में काम करने के उद्देश्य से है।

व्हाइट हाउस के ग्रैंड फोयर में तैयार बयान में शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दुनिया में बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों पर मानव विकास तथा प्रगति को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वह ट्रंप के साथ मिलकर चीन-अमेरिका संबंधों को भविष्य की ओर स्थिर दिशा में आगे बढ़ाने के लिए काम करने को तैयार हैं।

शी ने कहा कि दोनों देशों के हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। साथ मिलकर काम करने की काफी गुंजाइश है। उनके मुताबिक, चीन-अमेरिका सहयोग दुनिया की हर समस्या का समाधान नहीं कर सकता, लेकिन इसके बिना कई वैश्विक समस्याओं का समाधान मुश्किल होगा।

एआई पर मानव नियंत्रण की वकालत—

शी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भी दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका एआई के क्षेत्र में अग्रणी देश हैं। दोनों के पास इस तकनीक को मानव हित में विकसित और प्रबंधित करने की क्षमता तथा जिम्मेदारी है।

शी ने कहा कि एआई का विकास हमेशा मानव नियंत्रण में रहना चाहिए। इसका इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए। ट्रंप और शी की बातचीत में एआई के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है।

अमेरिका में दो पांडा भेजे जाएंगे—

शी ने अमेरिका और चीन के बीच पांडा को लंबे समय से चले आ रहे ‘मैत्री दूत’ के रूप में भी याद किया। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में चीन के दो विशाल पांडा अटलांटा के एक चिड़ियाघर पहुंचेंगे। अटलांटा चिड़ियाघर ने बताया है कि दोनों पांडा के नाम पिंग पिंग और फू शुआंग हैं।

बतादें कि चीन और अमेरिका के बीच पांडा कूटनीति की शुरुआत 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के बाद हुई थी। दोनों देशों के चिड़ियाघरों के बीच हुए समझौतों के अनुसार, पांडा और उनसे पैदा होने वाली संतानों का स्वामित्व चीन के पास रहता है। संरक्षण के लिए संबंधित चिड़ियाघरों को भुगतान करना होता है।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!