
डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगा बढ़ावा: कृषि मंत्री
पटना- 31 अगस्त। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक समय पर एवं सुगमता से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि उर्वरक किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कृषि इनपुट है और इसकी उपलब्धता, वितरण एवं बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कृषि मंत्री ने साेमवार काे कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमकाे संबाेधित करते हुए कहा कि इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल एवं किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। फ्रेमवर्क फाॅर फर्टिलाइजर सेल एपलिकेशन सिस्टम (एफएसएएस) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है। इसके साथ शाईएफएमएस एवं एग्रीस्टेक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है।
नई व्यवस्था की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी फार्मर रजिस्ट्री में उपलब्ध है, उनके लिए आवश्यक विवरण फार्मर आईडी के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। वहीं, अन्य किसान भी एफएसएएसपर पंजीकरण कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए किसान जिस खेत के लिए उर्वरक लेना चाहते हैं, उस खेत का खाता एवं खेसरा संख्या, क्षेत्रफल तथा फसल का विवरण उपलब्ध कराएंगे। उपलब्ध जानकारी के आधार पर आईसीएआर की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरक की आवश्यकता की गणना की जाएगी तथा किसान को एक क्यूआर काेड उपलब्ध कराया जाएगा। यह क्यूआरकाेड तीन दिनों तक वैध रहेगा और इसके माध्यम से किसान क्यूआरकाेड में अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर उर्वरक खरीद सकेंगे।
उन्होंने बताया कि 1 सितंबर से 19 जिलों में तथा 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से उर्वरक की बिक्री एवं वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा उपलब्धता, स्टॉक, वितरण एवं बिक्री की बेहतर निगरानी संभव होगी।
विजय सिन्हा ने कहा कि नई डिजिटल व्यवस्था को केवल तकनीकी परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि किसान हित में किए जा रहे प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए। डिजिटल प्रणाली लागू करने के साथ यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है कि तकनीक के कारण किसी किसान को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक का उपयोग किसान की सुविधा के लिए होना चाहिए, किसान की कठिनाई बढ़ाने के लिए नहीं।
कृषि मंत्री ने जिला स्तर के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी उर्वरक विक्रेताओं को नई व्यवस्था की पूरी जानकारी दी जाए तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और विभागीय पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसानों को उर्वरक की सुलभ उपलब्धता हो।
उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें।
कृषि मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों से कहा कि वे नई व्यवस्था को पूरी गंभीरता से समझें और इसके क्रियान्वयन के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों एवं सुझावों को खुलकर साझा करें, ताकि व्यवस्था को और अधिक सरल, प्रभावी एवं किसान हितैषी बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के हित में कृषि विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। विभाग का उद्देश्य केवल डिजिटल सिस्टम लागू करना नहीं, बल्कि संपूर्ण उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाना है।
श्री सिन्हा ने कहा कि विभाग के प्रत्येक पदाधिकारी की जिम्मेदारी है कि सरकार की नीतियों एवं योजनाओं का वास्तविक लाभ खेत और किसान तक पहुंचे।



