
बिहार में शिक्षा विभाग का गजब कारनामा, तबादला में उर्दू शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया आया सामने, उर्दू छात्रों के रहने के बावजूद ई-शिक्षा कोष पर देखया गया सरप्लस
पटना- 30 जुलाई। बिहार के सरकारी विद्यालयों में छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में राज्य के अनेक विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाई जा रही है। बतादें कि राज्य के जिलों में सरकारी विद्यालयों में उर्दू के स्वीकृत शिक्षकों के पदों को सरप्लस बताकर उर्दू शिक्षकों के साथ अन्याय की जा रही है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में उर्दू पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगभग 300 होने के बाद भी केवल एक ही उर्दू शिक्षक कार्यरत है। अब उर्दू के एकमात्र शिक्षक का भी स्थानांतरण कर उर्दू का पद समाप्त करने की साजिश किया जा रहा है। जिससे उर्दू की पढाई करने वाले बच्चों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बतादें कि राज्य के मधुबनी जिला मुख्यालय में अवस्थित वाटसन हाई स्कूल,बालिका षिव गंगा हाई,सूड़ी हाई स्कूल,कोइलख हाई स्कूल,उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिपरौन सहित जिले दर्जनों विद्यालयों के वर्ग 9-10 एवं 11-12 में उर्दू छात्रों की बड़ी संख्या रहने के बाद भी ई-षिक्षा कोष पर शिक्षकों का पद रिक्त कर सरप्लस दिखाया जा रहा है। वहीं विद्यालयों में संस्कृत के शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या-8 से 10 होने के बाद भी संस्कृत के पद यथावत रखा गया हैं, लेकिन राज्य की दुसरी सरकारी भाषा उर्दू जैसे संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त विषय के साथ यह भेदभावपूर्ण व्यवहार अपनाया जा रहा है। उर्दू एक्षन कमिटी मधुबनी के जिलाध्यक्ष सह नगर निगम के डिप्टी मेयर अमानुल्लाह खान ने बताया कि बिहार सरकार एवं शिक्षा विभाग उर्दू शिक्षकों के स्थानांतरण तथा उर्दू पदों को समाप्त करने के कुचक्र को नहीं रोका गया, तो आंदोलन शुरु किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की वास्तविक संख्या के आधार पर निर्णय लिया जाए तथा उर्दू भाषा और उसके विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।
वहीं जदयू नता अधिवक्ता डा. महताब आलम ने इस संबंध में षिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर उर्दू के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त करने की मांग किया है। उन्होने कहा है कि प्रदेश की द्वितीय राज भाषा के लंबित उत्थान के लिए सरकार संकल्पित रहकर उर्दू के उत्थान के लिए सदा कार्य करते चले आते हैं। इसलिए जिन विद्यालयों में उर्दू पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्र नामित रहते हैं वहां उर्दू शिक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित होता है।
उल्लेखित है कि वर्तमान में सरप्लस के नाम पर जिस विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्र वो उर्दू शिक्षक मौजूद हैं वहां से उर्दू शिक्षक को सरप्लस के नाम पर हटाने हेतु ई- शिक्षा कोष पर चिह्नित मैसेज भेजा जा रहा है जो दुखद वो खेद जनक है जो जांचोपरांत कारवाई आवश्यक है। उक्त मामला प्राइमरी, मिडिल, उच्च एवं उच्चतर विद्यालय में. एक जैसी है।
उन्होने षिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से मांग किया है कि आप अपने स्तर से अल्पसंख्यक छात्र वो उर्दू शिक्षक के साथ भेद भाव पूर्ण कार्य कर रहे दोषी को चिन्हित कर कार्रवाई करते हुए उर्दू छात्र वो उर्दू शिक्षक के हित में स्पष्ट आदेश/ निर्देश निर्गत कर अनुग्रहित करने की कृपा करेंगे।
गौरतलब है कि शिक्षा विभाग के अधिसुचना के अनुसार शिक्षकों को 29 जुलाई से 05 अगस्त तक तबादला के लिए ई-शिक्षा कोष पर आवेदन करना है।



