
UN महासभा में अब्बास का अमेरिकी प्रशासन पर निशाना, कहा- फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को रोका जाना गलत
न्यूयॉर्क- 24 सितंबर। फिलिस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए अमेरिकी प्रशासन द्वारा उन्हें लगातार दूसरे वर्ष व्यक्तिगत रूप से यूएन में आने से रोकने पर आपत्ति जताई। उन्होंने अमेरिका से फिलिस्तीनी प्राधिकरण पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने, रामल्ला के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की।अब्बास ने कहा कि फिलिस्तीनी नेतृत्व अमेरिकी प्रतिबंधों और उन्हें लागू करने के लिए दिए गए आधारों को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने व्यापक राष्ट्रीय सुधार कार्यक्रम लागू किया है। अंतरराष्ट्रीय कानून तथा हिंसा एवं आतंकवाद से दूरी बनाए रखने की प्रतिबद्धता निभाई है।
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का रुख करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। अब्बास ने अमेरिकी कदम को मेजबान देश के रूप में अमेरिका के दायित्वों के विपरीत बताया। वाशिंगटन से फिलिस्तीनी प्राधिकरण के साथ संवाद बहाल करने का आग्रह किया।
दरअसल, अमेरिका ने पिछले सप्ताह फिलिस्तीनी अधिकारियों पर पिछले वर्ष लगाए गए प्रतिबंधों को बढ़ाने की घोषणा की थी। अमेरिकी पक्ष ने इसके लिए ऐसे कदमों का हवाला दिया था, जिनमें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इजराइल के खिलाफ कार्रवाई, एकतरफा फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता को आगे बढ़ाना तथा आतंकवाद या हिंसा से जुड़े आरोप शामिल हैं।
इजराइल पर गंभीर आरोप—
अब्बास ने अपने संबोधन में इजराइल पर गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ “नरसंहार की जंग” चलाने और वेस्ट बैंक में बस्तियों तथा बसने वालों की हिंसा को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वेस्ट बैंक में बस्तियों का विस्तार तेज हो रहा है। क्षेत्र को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा रहा है।
अब्बास ने भूमि कब्जाने, घरों को गिराने, चौकियों और छापेमारी जैसी कार्रवाइयों का भी उल्लेख किया। इन्हें भेदभाव तथा विस्थापन से जुड़ी नीतियों का हिस्सा बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजराइल फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से जबरन बाहर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यरुशलम को अलग-थलग करने और उसके स्वरूप को बदलने का भी आरोप लगाया। अब्बास के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां केवल दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए ही नहीं, बल्कि फिलिस्तीनी लोगों के अपने क्षेत्र में भविष्य के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं।
अब्बास ने यूएन सदस्य देशों से अपील की कि वे 1948 जैसी किसी और “नकबा” और बड़े पैमाने पर विस्थापन या हत्याओं को दोहराने की अनुमति न दें।



