
नाग पंचमी : नाग देवता की हुई पूजा-अर्चना, सर्पदंश का नहीं रहता भय, परिवार में आती सुख-शांति
मधुबनी – 17 अगस्त। श्रावण मास की शुक्ल पंचमी यानी आज नाग पंचमी का पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखे गए। घर के मुख्य द्वार और दीवार पर गोबर से नाग की आकृति बनाकर पूजा की गई। नाग को दूध, दूब, फूल और लावा चढ़ाकर पूजा किया। स्थानीय मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। मान्यता है कि आज के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्पदंश का भय नहीं रहता और परिवार में सुख-शांति आती है।
इधर, जिले के मधेपुर प्रखंड के प्रसाद गांव स्थित प्रसिद्ध गहबर स्थान में श्रद्धालुओं नाग देवता की पूजा की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने डाली चढ़ाया। दूर-दूर के गांवों से बच्चियां व महिलाएं डाला लेकर इस स्थान पर पहुंची थीं। श्रद्घालुओं का कहना है कि यहां संतान सहित अन्य मनोकामनाएं पूरा होता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस स्थान पर करीब दो सौ वर्ष से विषहारा का पूजा की जाती है।
हिंदू धर्म में नागों को भगवान शिव के आभूषण और भगवान विष्णु की शैय्या माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डसा था। उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने नाग यज्ञ किया था। उसी दिन आस्तिक मुनि के कहने पर यज्ञ रोका गया और सभी नागों को जीवनदान मिला। तभी से नाग पंचमी मनाई जाती है।



