
MADHUBANI: संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. शशिनाथ की ‘चर्यागीत’ मैथिली साहित्य की प्राचीन संपत्ति, दीप में हुआ लोकार्पण
मधुबनी – 28 जुलाई। जिले के लखनौर प्रखंड के दीप गांव में पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृतविश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. शशिनाथ झा द्वारा लिखित ‘चर्यागीत’ का प्रकाशन नवारंभ, मधुबनी द्वारा की गई है। ‘
चर्यागीत’ पुस्तक का लोकार्पण प्रसिद्ध समालोचक डॉ. रामानंद झा रमण द्वारा किया गया।मिथिल मैथिली के विशिष्ट अध्येता अमल कुमार झा ने कहा की चर्या का अर्थ पवित्र आचार होता है। यह सातवीं सदी के सरह, भूसुक आदि सिद्धों की रचना है। इसकी व्याख्या में स्पष्ट किया गया है कि चर्यागीत मैथिली साहित्य की प्राचीन संपत्ति है। डॉ रामानंद रमण ने कहा कि पुस्तक की भूमिका में लेखक ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है। मैथिली भाषा के इस पुस्तक के संज्ञा सर्वनाम क्रिया आदि शब्दों का भाषा वैज्ञानिक विवेचन किया गया है। मैथिली भाषा के स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में इसे लाया गया है। समारोह में पं. दीनानाथ मिश्र, रामप्रसाद मंडल, डा. प्रमोद झा, उदयनाथ झा सहित अन्य साहित्यकार उपस्थित रहे। व्याख्याकार ने कहा की चर्यापद के स्वतंत्र रूप से मैथिली साहित्य के प्राचीन ग्रंथ सिद्ध करते हुए प्रकाशन होना महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। उदयनाथ झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



