
MADHUBANI:- दबंगों और भू-माफियाओं के कब्जे में चकदह गुलटेनी पोखर की जमीन,लोगों में आक्रोश
"लक्ष्य तक की 'पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर" अभियान
— नगर निगम क्षेत्र की तालाबों, सरोवर, कुआं की दशा को लेकर ‘लक्ष्य तक’ ने ‘पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत प्रथम चरण में नगर निगम क्षेत्र की एक तालाब की प्रतिदिन पड़ताल होगी। उम्मीद है कि जल संरक्षण के दिशा में यह अभियान शासन-प्रशासन और आम लोगों के बीच की सार्थक कड़ी साबित होगी। ‘पारंपरिक जलस्त्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान के तीसरे दिन प्रस्तुत है नगर निगम क्षेत्र के चकदह गुलटेनी पोखर की पड़ताल। अभियान को लेकर निगम क्षेत्र की तालाब संबंधी जानकारी हमें वाटसएप पर उपलब्ध कराई जा सकती है। जिसे ‘लक्ष्य तक’ पर जगह दी जा सकती है
मधुबनी- 23 अप्रैल। दबंगों और भू-माफियाओं के आगे रहिका अंचल कार्यालय और नगर निगम प्रशासन बौना नजर आ रहा है। हालात यह है कि पिछले कुछ सालों में निगम क्षेत्र की सैरात सूची में शामिल सरकारी तालाबों का मानो अतिक्रमण को खुली छूट मिल गई हो। निगम प्रशासन अतिक्रमण के नाम पर शहर की सड़क किनारे चल रहे दुकानों तक ही सिमट गई है। अतिक्रमण के चपेट में नगर निगम क्षेत्र के गुलटेनी पोखर चकदह (मंसूरी टोल) स्थित तालाब अतिक्रमण का शिकार होकर कराह रहा है। रहिका अंचल कार्यालय और नगर निगम प्रशासन की उपेक्षा झेल रहे इस तालाब के पश्चिमी, उत्तरी व दक्षिणी भिंडा पर तीन दर्जन से अधिक लोगों ने घर-मकान बना लिया है।
इस तालाब की जमीन से अवैध कब्जा खाली कराने के स्थानीय लोगों द्वारा जिलाधिकारी, रहिका अंचल अधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी से लगातार कार्रवाई की मांग करते रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तालाब भिंडा पर स्थानीय लोगों द्वारा छठ पूजा किया जाता रहा है। लेकिन अतिक्रमण के चलते छठ पूजा में भारी समस्या आने लगी। जिससे श्रद्धालु इस तालाब पर छठ पूजा करने से बचने लगे। लोगों ने बताया कि तालाब में शौचालय गंदगी का बहाव और आसपास का कचरा फेंकने से तालाब का पानी दूषित हो चुका है। जिससे लोग इसमें स्नान करने से भी बचने लगे हैं।
बतादें कि साल 2022 में न्यायालय अनुमंडल कार्यालय, सदर, मधुबनी द्वारा रहिका अंचल अधिकारी तथा नगर थानाध्यक्ष को इस तालाब की अतिक्रमित जमीन को एक सप्ताह में खाली कराने का निर्देश दिया गया था। निर्देश में बताया गया कि अनुदेशक चकबन्दी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना द्वारा मुख्यमंत्री सविवालय से प्राप्त आवेदन में वर्णित तथ्यों का जांचकर अतिक्रमित भूमि को मुक्त करते हुए अनुपालन प्रतिवेदन एक सप्ताह के अंदर समर्पित किया जाए। ताकि प्रतिवेदन अपर समाहर्ता, गधुबनी को भेजना सुनिश्चित किया जाए। इसके चार साल गुजर जाने के बाद भी अतिक्रमण खाली नहीं हो सकी है।



