
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध पर वेटिकन प्रमुख पोप लियो के रुख की आलोचना की
वाशिंगटन- 13 अप्रैल। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेटिकन प्रमुख पोप लियो (चतुर्दश) की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने ईरान युद्ध पर पोप के रुख की निंदा की। ट्रंप ने कहा कि पोप लियो की विदेश नीति बहुत बुरी है। ट्रंप ने रविवार शाम पत्रकारों से कहा, “हमें ऐसा पोप पसंद नहीं है जो यह कहे कि परमाणु हथियार रखना ठीक है। वह यह नहीं सोचते कि अगर ईरान परमाणु हथियार संपन्न हो गया तो दुनिया को उड़ा देगा।”
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार पहले अमेरिकी पोप और वेटिकन प्रमुख लियो अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ युद्ध को लेकर लगातार मुखर होते जा रहे हैं। पोप ने पिछले सप्ताह ट्रंप की ईरान को दी गई धमकी की निंदा करते हुए कहा था कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ट्रंप ने कहा था कि आज रात पूरी सभ्यता मिट जाएगी।यह धमकी ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनने से कुछ घंटे पहले आई थी।
ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस संघर्ष के दौरान अपने बयानों में ईश्वर का जिक्र किया है। हेगसेथ ने तो इस युद्ध को ईश्वरीय समर्थन बताया है और इसके लिए धार्मिक ग्रंथों का भी सहारा लिया है। पोप लियो ने इस विचार का दृढ़ता से विरोध किया है। पोप लियो ने पाम संडे के अवसर पर कहा, ”यीशु शांति के राजा हैं। वो युद्ध को अस्वीकार करते हैं। कोई भी व्यक्ति युद्ध को सही ठहराने के लिए उनका इस्तेमाल नहीं कर सकता।” इसके बाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोप की आलोचना की।
राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, “उन्हें ऐसा कोई पोप नहीं चाहिए जो यह मानता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। और जो यह सोचता हो कि अमेरिका का वेनेज़ुएला पर हमला करना एक बेहद खराब कदम था।” ट्रंप ने कहा, “मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे।” राष्ट्रपति ने दावा किया कि लियो में पोप बनने की कोई अहर्ता नहीं थी। उन्हें चर्च ने सिर्फ इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे अमेरिकी थे।
ट्रंप की आलोचना के जवाब में वेटिकन के अधिकारी फादर एंटोनियो स्पडारो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप एक नैतिक आवाज को दबाना चाहते हैं। स्पडारो ने एक्स पर कहा कि लियो से ट्रंप बहस नहीं कर सकते। पोप लियो के शब्दों का गहरा असर होता है। इसलिए ट्रंप बेचैन हो जाते हैं। पोप लियो पहले भी परमाणु हथियारों के बढ़ते प्रसार के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं।
पिछले जून में जब ट्रंप ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने पर विचार कर रहे थे, तब उन्होंने कहा था, “परमाणु खतरे से मुक्त एक सुरक्षित दुनिया बनाने के संकल्प को आपसी सम्मान और सच्ची बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि न्याय, भाईचारे और सबके भले पर आधारित एक स्थायी शांति स्थापित की जा सके।” इस विवाद पर व्हाइट हाउस ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।



