भारत

जैन धर्म का अहिंसा का संदेश पूरी मानवता के लिए जरूरी: प्रधानमंत्री

गांधीनगर- 31 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि दुनिया आज अस्थिरता और अशांति के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में जैन धर्म का अहिंसा का संदेश पूरी मानवता के लिए बेहद प्रासंगिक है।

महावीर जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “आज दुनिया में जिस तरह के हालात हैं। विश्व अस्थिरता और अशांति की आग में झुलस रहा है। इस संग्राहलय की विरासत, इसका संदेश भारत ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए अहम है। हमारा प्रयास होना चाहिए दुनिया के देशों से यहां आने वाले जिज्ञासु, विद्यार्थी और शोधकर्ता और अन्य लोग भारत के जैन धर्म की शिक्षाओं को विश्व के कौने-कौने में पहुंचाएं।”

उन्होंने भगवान महावीर को नमन करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात चिंता का विषय है, जहां कई क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे समय में जैन दर्शन के अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह के सिद्धांत दुनिया को नई दिशा दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्राट संप्रति ने शासन को सेवा का माध्यम बनाकर अहिंसा के विस्तार का कार्य किया और उनका जीवन आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय न केवल भारत की प्राचीन धरोहर को संरक्षित करता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इससे जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।

मोदी ने कहा कि भारत में ज्ञान की परंपरा हमेशा समृद्ध रही है लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों ने मजहबी संक्रीणता में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों की अमूल्य पांडुलिपियां नष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी इन धरोहरों के संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों ने पांडुलिपियों की उपेक्षा की, लेकिन अब उन्हें खोजने, सहेजने और संरक्षित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ जैसे कदम उठाए गए हैं, जिसमें आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और उन्हें वैज्ञानिक तरीकों से संरक्षित किया जा रहा है। इन प्रयासों में उच्च-गुणवत्ता वाली स्कैनिंग, रासायनिक उपचार और व्यापक डिजिटल संग्रहों का निर्माण शामिल है। इन सभी का उद्देश्य हमारी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

उल्लेखनीय है कि सम्राट संप्रति संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है। सात दीर्घाओं में विभाजित इस संग्रहालय में दुर्लभ अवशेष, जैन कलाकृतियां, प्राचीन पांडुलिपियां और पारंपरिक धरोहरों का व्यापक संग्रह प्रदर्शित किया गया है। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह संग्रहालय आगंतुकों और शोधकर्ताओं को भारत की सभ्यतागत यात्रा का गहन अनुभव प्रदान करता है।

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