
BIHAR:- वित्त वर्ष 2019-20 में 1,784 करोड़ का राजस्व घाटा
पटना-02 दिसंबर। बिहार विधानसभा में 31 मार्च, 2020 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट पेश किया गया। डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने विधानमंडल के दोनों सदनों में इस रिपोर्ट को रखा। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान राज्य को 1,784 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है, जो 2008-09 के बाद पहली बार है।
सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 14,724 करोड़ का राजकोषिय घाटा दर्ज किया है, जो गत वर्ष की तुलना में 917 करोड़ यानी 6.64 प्रतिशत अधिक है। राज्य का प्राथमिक घाटा 2015-16 में 4,963 करोड़ से घटकर 2019-20 में 3,733 करोड़ हो गया है, जो वर्ष 2018-19 में 3,736 करोड़ की तुलना में मामूली कमी दर्ज की गई।
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में 2019-20 में राज्सव प्राप्तियों में 7,561 यानी 5.74 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो बजट आकलन में 29.71 प्रतिशत कम था। पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 में राजस्व व्यय में 1,120 करोड़ यानी 0.90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो कि बजट आकलन में 18.82 प्रतिशत कम था। वर्ष 2018-19 की तुलना में पूंजीगत व्यय में 8,754 करोड़ यानी 41.57 प्रतिशत की कमी हुई है जो बजट आकलन से 66.38 प्रतिशत कम है। वित्त वर्ष के अंत में बकाया लोकऋण पिछले वर्ष की तुलना में 22,035 करोड़ यानी 17.47 प्रतिशत बढ़ गया।
सीएजी रिपोर्ट में उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। 31 मार्च 2020 तक 79,690.92 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित थे।अधिक मात्रा में लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र से दुरुपयोग एवं गबन की संभावना रहती है। लंबित विस्तृत आकस्मिक विपत्र में कुल 9155.44 करोड़ की 20,642 एसी विपत्रों से आहरित राशि मार्च 2020 तक डीसी बिल के और प्रस्तुतीकरण के कारण लंबित था। अग्रिम का लंबी अवधि तक और असमायोजित रहना दूरविर्नियोजन विनियोजन के जोखिम से भरा होता है।



