
चीन ने कोरोला नाके को अंतरराष्ट्रीय सीमा नाका बनाने का दिया प्रस्ताव, नेपाल को लिखा पत्र
काठमांडू- 02 अक्टूबर। चीन ने तिब्बत के झोंगबा काउंटी से जुड़े नेपाल के मुस्तांग जिले के लोमान्थांग स्थित कोरोला नाके को अंतरराष्ट्रीय सीमा नाका बनाने का प्रस्ताव दिया है। चीन ने इस सप्ताह विदेश मंत्रालय के माध्यम से नेपाल के भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय को पत्र भेजकर यह प्रस्ताव रखा है। कोरोला नाका समुद्र तल से करीब 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
गत 26 अगस्त को भोटेकोसी में आई विनाशकारी बाढ़ में रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा क्षेत्र के सभी बुनियादी ढांचे बह जाने के बाद फिलहाल कोरोला नाके के रास्ते सामानों की आवाजाही हो रही है। हालांकि, पिछले सप्ताह आई बाढ़ के कारण म्याग्दी में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से नेपाल की ओर से कोरोला नाके तक आवाजाही में बाधा आई है।
नेपाल इस अवरोध को हटाने की तैयारी कर रहा है। इसी बीच चीन ने एक वर्ष के लिए कोरोला को अंतरराष्ट्रीय सीमा नाका घोषित करने का प्रस्ताव दिया है। चीन ने नेपाल की जरूरत के अनुसार सीमा क्षेत्र में आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग की पेशकश भी की है।
नेपाल की ओर फिलहाल सीमा पर कस्टम समेत व्यवस्थित बुनियादी ढांचा, बिजली और पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं है। वहीं, चीन अपनी ओर से आव्रजन, कस्टम और अन्य सीमा संबंधी बुनियादी ढांचे तैयार कर चुका है। ल्हासा स्थित तिब्बत के लिए नेपाल के महावाणिज्यदूत लक्ष्मीप्रसाद निरौला ने बताया कि चीन की ओर से कोरोला नाके को अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
नेपाल और चीन के बीच वर्तमान में तीन अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके संचालित हैं, जबकि करीब 14 पारंपरिक सीमा नाके हैं। चीन ने तत्काल एक वर्ष के लिए कोरोला को अंतरराष्ट्रीय नाके का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। नेपाली अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, नेपाल पहले से ही कोरोला नाके को व्यवस्थित कर अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके के रूप में विकसित करने की बात करता रहा है। अब चीन की ओर से प्रस्ताव आने के बाद नेपाल इसे स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल तीन अंतरराष्ट्रीय नाके संचालित—
नेपाल-चीन के बीच ये तीन अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके संचालित हैं : सिंधुपालचोक का तातोपानी-झांगमु नाका, रसुवा का रसुवागढ़ी-केरुंग नाका तथा हुम्ला का हिल्सा-पुरांग नाका। इसके अलावा करीब 14 पारंपरिक सीमा नाके हैं और कोरोला भी फिलहाल पारंपरिक नाके के रूप में ही दर्ज है।
बीते साल 2025 में रसुवागढ़ी क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद कोरोला नाके के रास्ते सामानों की आवाजाही शुरू हुई थी। रसुवागढ़ी-केरुंग को जोड़ने वाला पक्का सीमा पुल बह जाने के बाद चीन ने वहां बेली ब्रिज लगाया था। इसी पुल से यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही हो रही थी।
लेकिन इस वर्ष 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ में नेपाल और चीन की सीमा पर बने पुलों सहित सभी संरचनाएं बह गईं और पूरा क्षेत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चीन ने अपनी सीमा तक सड़क का ट्रैक खोल दिया है, लेकिन वहां अभी आवश्यक संरचनाएं मौजूद नहीं हैं। नेपाल की ओर सीमा तक सड़क खोलना तत्काल संभव नहीं माना जा रहा है।
कोरोला नाका अभी पारंपरिक सीमा नाके के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। यहां से सामानों का आवागमन तो हो रहा है, लेकिन मुस्तांग और तिब्बत के झोंगबा काउंटी के स्थानीय लोगों को ही सीमा से 30 किलोमीटर के दायरे में व्यापार और आवागमन की अनुमति है।
अगर कोरोला को अंतरराष्ट्रीय सीमा नाके का दर्जा मिल जाता है, तो अन्य क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भी इस मार्ग से आवाजाही की अनुमति मिल सकेगी। इससे नेपाल-चीन व्यापार के लिए इस नाके की भूमिका और बढ़ सकती है।
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, चीन अगले हफ्ते से तातोपानी नाका फिर से संचालित करने को लेकर भी सकारात्मक है। नेपाली महावाणिज्यदूत लक्ष्मी प्रसाद निरौला ने कहा कि इस संबंध में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और उन्हें नाका खुलने की उम्मीद है।



