
नवरात्र विशेष: महानवमी पर सिद्धियों का द्वार खोलती हैं माँ सिद्धिदात्री: पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र का अंतिम और सबसे फलदायी दिन है महानवमी। इस वर्ष नवरात्र 10 दिन की होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि नवरात्र के नौवें दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
पं. झा के अनुसार पुराणों में माँ सिद्धिदात्री को सिद्धियों की दात्री कहा गया है। इनके पास अष्ट सिद्धियाँ – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व तथा नव निधियाँ विद्यमान हैं। माँ कमल के आसन पर विराजमान हैं और चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण करती हैं।
कथा है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण के लिए माँ सिद्धिदात्री की ही तपस्या की थी। इन्हीं की कृपा से भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त किया था।
मान्यता है कि नवमी के दिन यदि केवल माँ सिद्धिदात्री की भी सच्चे मन से पूजा कर ली जाए तो पूरे नवरात्र की पूजा का फल मिल जाता है। इस दिन की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में यश, बल और धन की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि इसी दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर विजय प्राप्त की थी, इसलिए इसे विजय नवमी भी कहते हैं। नवरात्रि व्रत की पूर्णता हवन, कन्या पूजन और पारण से इसी दिन होती है।
नवमी के दिन नौ कन्याओं को नौ देवियों का स्वरूप मानकर पूजन की परंपरा है। उनके पैर धोकर, तिलक लगाकर हलवा-पूरी-चना खिलाया जाता है और दक्षिणा दी जाती है। मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र व्रत अधूरा है।
पं. झा के अनुसार इस दिन राशि अनुसार दान का भी विशेष महत्व है। जैसे मेष राशि वालों को कन्याओं को दक्षिणा और वृषभ राशि वालों को खीर, दूध और सफेद मिठाई का दान करना कल्याणकारी होता है।



