धर्म-ज्योतिष

महानवमी पर 18 सिद्धियों का द्वार खोलती हैं माँ सिद्धिदात्री: महंत रत्नेश्वर दास से जानें मार्कण्डेय पुराण का रहस्य

मधुबनी – 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र की महानवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सिद्धि प्राप्ति का महापर्व है। इसका वर्णन किन शास्त्रों में है और क्यों इसे नवरात्रि की पूर्णता माना जाता है, इस पर प्रसिद्ध संत महंत रत्नेश्वर दास ने विशेष जानकारी दी।

महंत ने बताया कि महानवमी का उल्लेख प्रमुख रूप से मार्कण्डेय पुराण, श्रीमद्देवी भागवत महापुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। मार्कण्डेय पुराण में माँ सिद्धिदात्री को अष्ट सिद्धियों की स्वामिनी बताया गया है।
अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व – ये आठ सिद्धियाँ माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही साधक को प्राप्त होती हैं। जो मनुष्य नवमी के दिन सच्चे मन से इनका स्मरण करता है, उसे पूरे नवरात्र के नौ दिन की पूजा का फल एक साथ मिल जाता है।

महंत रत्नेश्वर दास ने बताया कि देवी भागवत के अनुसार सृष्टि के आरंभ में जब कुछ नहीं था, तब ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना के लिए माँ सिद्धिदात्री की ही तपस्या की थी। सबसे अद्भुत कथा भगवान शिव से जुड़ी है।

देवी पुराण में स्पष्ट लिखा है कि स्वयं भगवान शिव ने भी सभी सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए माँ सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की थी। माँ प्रसन्न हुईं और उन्होंने शिव को समस्त सिद्धियाँ प्रदान कीं। उन्हीं की कृपा से शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे संसार में ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए। यह सिद्ध करता है कि शक्ति के बिना शिव भी अधूरे हैं।

महंत ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में अष्ट सिद्धियों के अलावा 10 अन्य सिद्धियों – सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व, दूरश्रवण, परकायप्रवेश, वाक् सिद्धि, कल्पवृक्षत्व, सृष्टि, संहार सामर्थ्य, अमरत्व और सर्वन्यायकत्व का भी वर्णन है। इस प्रकार कुल 18 सिद्धियों की दात्री माँ सिद्धिदात्री ही हैं।
महंत रत्नेश्वर दास ने बताया कि इस वर्ष 19 अक्टूबर को महानवमी का योग अत्यंत दुर्लभ है। इस दिन अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही है, इसलिए इसी दिन संधि पूजा, हवन और कन्या पूजन होगा।

माँ कमल के आसन पर विराजमान हैं। उन्हें लाल चुनरी, गुड़हल का फूल और शहद, हलवा-पूरी-चना का भोग अति प्रिय है। “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” मंत्र का जाप और नवकन्या पूजन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
महंत ने कहा कि महानवमी भोग-विलास नहीं, बल्कि आत्मसिद्धि का दिन है। इस दिन माँ से अष्ट सिद्धि नहीं, बल्कि अहंकार के नाश और जनकल्याण की सिद्धि मांगनी चाहिए।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!