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नेपाल में फिर 24 से 28 सितंबर के बीच भारी आफत की बारिश की आशंका, मौसम विशेषज्ञों ने सतर्कता की दी सलाह

काठमांडू- 20 सितंबर। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव क्षेत्र के प्रभाव से 24 से 28 सितंबर के बीच नेपाल के विभिन्न हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का पूर्वानुमान लगाया गया है। मौसम विशेषज्ञों ने कुछ इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताते हुए लोगों से पहले से तैयारी करने और सतर्क रहने की अपील की है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के जलविज्ञानी एवं मौसम विशेषज्ञ बिनोद पोखरेल ने बताया कि विभिन्न मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के अध्ययन से 24 से 28 सितंबर के बीच पूरे नेपाल में बारिश की मजबूत संभावना दिखाई दे रही है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि कुछ मॉडलों में इस अवधि के दौरान 400 मिलीमीटर से अधिक बारिश का अनुमान लगाया गया है। कुछ परिस्थितियों में यह आंकड़ा 741 मिलीमीटर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी बारिश पूरे देश में समान रूप से नहीं होगी बल्कि कुछ खास क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक हो सकता है।

पोखरेल ने कहा कि उन्होंने कई पूर्वानुमान मॉडलों का अध्ययन करने के बाद ही यह अनुमान सार्वजनिक किया है। उनका उद्देश्य लोगों को डराना नहीं बल्कि समय रहते तैयारी के लिए सचेत करना है। उनके अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत से मानसून की वापसी के दौरान वहां से आने वाली शुष्क हवाएं बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ रहे कम दबाव के क्षेत्र की दिशा और गति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके कारण इसका प्रभाव नेपाल की ओर बढ़ सकता है और कुछ इलाकों में भारी बारिश का खतरा बढ़ सकता है।

24 से 28 सितंबर के बीच ज्यादा प्रभाव की आशंका—

मौसम विशेषज्ञ एवं पर्यावरणविद् उज्ज्वल उपाध्याय ने भी बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली पर करीबी नजर रखने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश मौसम मॉडलों में 24 से 28 सितंबर के बीच गंभीर स्थिति के संकेत मिल रहे हैं। उपाध्याय के अनुसार, 26 सितंबर को जोखिम सबसे अधिक रहने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने लोगों को मौजूदा पूर्वानुमान को अंतिम नहीं मानने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि 24 से 26 सितंबर के बीच संभावित भारी बारिश की तीव्रता कम होने की अभी भी उम्मीद है। उन्होंने पिछले साल नवंबर में आए ‘मोंथा’ चक्रवात का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पूर्वी तट पर शक्तिशाली रहने के बावजूद नेपाल पहुंचने तक यह कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया था और अनुमान की तुलना में नेपाल में इसका नुकसान काफी कम हुआ था।

उपाध्याय ने लोगों से संभावित खतरे को लेकर घबराने के बजाय अधिक सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर अन्य इलाकों में 24, 25 और 26 सितंबर को लंबी दूरी की यात्रा को टालना उचित बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बारिश कितनी तीव्र होगी और कौन-कौन से इलाके सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

जल तथा मौसम विज्ञान विभाग भी कर रहा निगरानी—

नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही मौसम प्रणाली की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग के वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ बरुण पौडेल ने बताया कि ऐसी मौसम प्रणालियां कई बार कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल जाती हैं और अपनी दिशा भी बदल सकती हैं। इसलिए विभाग इस प्रणाली पर करीबी नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस मौसम प्रणाली के नेपाल पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। इसके बाद विभाग आधिकारिक सूचना जारी कर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा।

पौडेल ने कहा कि सोशल मीडिया पर 24 से 28 सितंबर के बीच भारी बारिश को लेकर चर्चा बढ़ रही है लेकिन बारिश की वास्तविक मात्रा, उसका भौगोलिक विस्तार और जोखिम के स्तर का स्पष्ट आकलन करने के लिए अभी कुछ और दिन इंतजार करना होगा। कम दबाव का क्षेत्र किस तरह विकसित होता है और आने वाले दिनों में इसकी दिशा तथा ताकत में क्या बदलाव आता है, इसी से नेपाल पर इसके वास्तविक प्रभाव का पता चलेगा।

पकी धान की फसल पर भी पड़ सकता है असर—

मौसम विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि पूर्वानुमान के अनुसार बारिश होती है तो इसका असर कृषि क्षेत्र, खासकर खेतों में तैयार हो रही पकी धान की फसल पर भी पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से मौसम की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।

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