
आस्था का सावन : भगवान शिव नीलकंठ महादेव के रूप में भी पूजित, विष ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की : पं. शंभूनाथ झा
मधुबनी- 31 जुलाई। भगवान शिव नीलकंठ महादेव के रूप में भी पूजित हैं। श्रावण माह के पवित्र महीने से भगवान नीलकंठ का गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव ने विष ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी। जिससे उनका गला नीला पड़ गया। विष के ताप को कम करने के लिए पवित्र जलाशयों का जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया।
विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर वज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने श्रावण माह की आध्यात्मिक महत्ता पर चर्चा करते हुए कहा माता पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत कर शिव को प्रसन्न किया। मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकंडेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी। सावन महीना पूरी तरह से भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है। पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से सभी प्रकार के दुखों और चिंताओं से मुक्ति प्राप्त करता है। सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने और भगवान शिव के ध्यान से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। व्रत में भगवान शिव का पूजन किया जाता है। सावन माह में प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक से अमिष्ट फल प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि गर्मी से मानव और पशु-पक्षी सभी व्याकुल होते हैं तो शीतलता प्रदान करने के लिए भगवान शिव और सावन का आगमन होता है। सावन में भगवान शिव की कृपा से मनुष्य ही नहीं, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, सब प्रसन्नता से भर जाते हैं। शिव की कृपा रूपी बारिश से पेड़-पौधे भी हरे-भरे नजर आने लगते हैं। यह सब शिव व सावन के अद्भुत संयोग से ही संभव हो पाता है।



