
आस्था का सावन : सावन मास में भगवान शिव की पूजा करने से होती मोक्ष की प्राप्ति : पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 01 अगस्त। भारतीय संस्कृति में पर्व, त्योहार, तिथि, नक्षत्र, दिन एवं मास का बड़ा महत्व है। सावन मास का विशेष महत्व है। शिव पुराण, स्कन्द पुराण, वायु पुराण और अन्य प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में सावन मास को सबसे उत्तम मास बताया गया है। सावन मास की महत्व पर चर्चा करते हुए पं. ऋषिनाथ झा ने कहा कि सावन मास में अर्पित की गई जल की एक बूंद भी भगवान शिव को अत्यंत प्रसन्न करती है। सावन मास में भगवान शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सावन मास भगवान शिव का सर्वप्रिय मास कहा गया है। इस माह प्रतिदिन शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। इस मास में की गई उपासना का फल अन्य किसी मास में संभव नहीं। नदी स्नान, दान और शिव पूजन को मोक्षदायक बताया गया है। पं. झा ने कहा कि सावन मास का स्थान विशेष माना गया है। यह केवल वर्षा ऋतु नहीं, बल्कि भगवान शिव की असीम कृपा का पावन मास है। इस मास की गई प्रत्येक साधना, पूजा, व्रत और जलाभिषेक का फल सहस्रगुना हो जाता है।
सावन का महीना भगवान शंकर को बहुत प्रिय है। इस अटूट आस्था और विश्वास के साथ सावन के महीने में शिव भक्त कांवर लेकर शिवालय पहुंचते हैं। पं. झा ने बताया कि जिस तरह इस माह में कीट-पतंगें अपनी सक्रियता बढ़ा देते हैं, उसी तरह मनुष्य को भी पूजा-पाठ में अपनी सक्रियता बढ़ा देनी चाहिए। सावन मास का सोमवार विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित माने जाते हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार इस दिन व्रत, उपवास, रुद्राभिषेकम्, जलाभिषेक तथा पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करने से शिवकृपा प्राप्त होती है। सोमवार व्रत कामनाओं की पूर्ति का साधन ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति समर्पण का पर्व है। इसे शिवभक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायक और फलदायी माना गया है।



