जमीअत उलमा-ए-हिंद की प्रबंध समिति के सम्मेलन में मदरसों-मस्जिदों और UCC पर बड़े प्रस्ताव पास
नई दिल्ली/मेवात, 30 अक्टूबर। हरियाणा के मेवात जिले के नूंह स्थित पीपाका सहसौला पट्टी के DLF स्प्रिंगफील्ड में जमीअत उलमा-ए-हिंद की प्रबंध समिति का दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन शुरू हो गया। सम्मेलन का आगाज जमीअत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसमें देशभर से करीब 2 हजार सदस्य, उलमा और प्रमुख हस्तियां शामिल हो रही हैं।
3 बड़े प्रस्ताव पास—
प्रबंध समिति ने मदरसों को मान्यता और जांच के नाम पर परेशान करने, उनके खिलाफ निराधार प्रचार और अल्पसंख्यक संस्थानों को विवाद में घसीटने पर गहरी चिंता जताई। सरकार से मांग की गई कि ऐसी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगे और संविधान के तहत मदरसों को प्राप्त अधिकारों की गारंटी दी जाए। साथ ही मदरसों के जिम्मेदारों को निर्देश दिया गया कि वे जमीन के दस्तावेज, नक्शे, छात्रों की ID और वित्तीय ऑडिट पूरी पारदर्शिता के साथ सुरक्षित रखें।
प्रस्ताव में कहा गया कि मस्जिदें सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि मुसलमानों की आस्था और संविधान के अनुच्छेद 25-26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति हैं। प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा गया कि इस कानून को सुप्रीम कोर्ट ने भी धर्मनिरपेक्ष ढांचे का हिस्सा बताया है।
अधीनस्थ अदालतों द्वारा इस कानून की अनदेखी कर सर्वे के आदेश देने पर चिंता जताई गई। संभल की जामा मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा गया कि एकतरफा सर्वे से शांति व्यवस्था बिगड़ी। मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश का पालन हो और 1991 के कानून के खिलाफ नए दावों को शुरू में ही खारिज किया जाए। बिना कानूनी प्रक्रिया के मस्जिदों को ध्वस्त करने पर रोक और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।
जमीअत ने फैसला किया कि उसकी सभी राज्य, जिला और तहसील इकाइयां एक ही दिन एक ही समय पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगी और अगले 6 महीने में मस्जिदों की जमीन, खसरा-खतौनी और कानूनी दस्तावेजों को दुरुस्त करने में मदद करेंगी।
UCC को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया गया।
इससे एक दिन पहले नई दिल्ली के मदनी हॉल में कार्यकारी समिति की बैठक में प्रस्तावों के प्रारूप पर चर्चा हुई थी। सम्मेलन के पहले दिन हरियाणा, पंजाब, हिमाचल के महासचिव मौलाना मोहम्मद याह्या करीमी ने स्वागत भाषण दिया और महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने सचिवीय रिपोर्ट पेश की।
यह सम्मेलन 31 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें मौलाना महमूद मदनी का विस्तृत संबोधन और देश की मौजूदा स्थिति पर अन्य प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे।



