
MADHUBANI:- नजरों से ओझल शहर का सप्ता पोखर, मछली-मखाना उत्पादन ठप, अतिक्रमणकारियों पर नहीं हो रही प्रशासनिक कार्रवाई
मधुबनी- 19 जुलाई। अतिक्रमण की होड़ में नगर निगम क्षेत्र की पोखर और जलकर गायब नजर आ रहा है। कई पोखर-जलकर का स्वरूप बदल जाने से लोगों के नजरों से ओझल हो गया है। वहीं, दशकों से मछली-मखाना उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। बता दें कि रहिका अंचल की सैरात सूची में अब तक शामिल सप्ता जलकर की जमीन पर तीन दर्जन से अधिक घर, दुकान और बिल्डिंग नजर आ रहा है।
शहर के बलुआ के समीप एक पेट्रोल पंप के दक्षिण खाता 213 खेसरा 2774, 3083 सप्ता पोखर (जलकर सह मखाना) की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने चहुंओर से कब्जा कर रखा है। अवध विहारी मंदिर के पीछे और गौसिया जामा मस्जिद के आगे इस पोखर के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है। यह पोखर जिला मत्स्य विभाग और रहिका अंचल प्रशासन की नजरों से दूर होता चला गया। जंगल-झाड़ से भर चुके पोखर की जमीन पर चहुंओर घर, दुकान और बिल्डिंग होने से पोखर तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया हैं। अतिक्रमण के चलते सप्ता पोखर का दायरा सिमटकर रह गया हैं। पोखर व उसके भिडे का अतिक्रमण का जंजाल फैलता चला गया। सरकारी सप्ता पोखर की जमीन पर निर्माण कार्य पर रोक की कार्रवाई नहीं होना जिला मत्स्य विभाग और रहिका अंचल कार्यालय की उदासीनता सामने आ रही है।
तालाब संरक्षण समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार व सचिव सुधीर कुमार ने बताया कि एक दशक पूर्व तक सप्ता पोखर की काफी अहमियत थी। साल दर साल अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से पोखर का वजूद समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया। सप्ता पोखर अस्तित्वहीन होने से आसपास के मुहल्लों में जलसंकट गहराता गया। उनहोंने रहिका अंचल अधिकारी और जिला मत्स्य पदाधिकारी से सप्ता पोखर की सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।



