
MADHUBANI:- सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार: वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-II के तहत 7 प्रखंड के 36 गांवों में मिशन मोड में कार्य जारी
मधुबनी- 11 सितंबर। जिलाधिकारी के निर्देश पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) तुषार कुमार ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-II की विभागवार प्रगति की समीक्षा की। सभी अधिकारियों को वर्कप्लान के अनुसार मानक और गुणवत्ता के साथ ससमय कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश दिया।
बैठक में डीडीसी ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और वहां रहने वाले लोगों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह विकास केवल सड़क-बिजली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, डिजिटल कनेक्टिविटी, कौशल विकास, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर समेकित प्रयास होंगे।
मधुबनी जिले के 7 प्रखंड और 36 चयनित गांव:
बासोपट्टी के 4 गांव खौना, जोंकी, लौठवा, मझौरा, हरलाखी 10 गांव गंगौर, गोपालपुर, हरलाखी, कमतौल, करुणा, मनोहरपुर, नहरनियां, फुलहर, पिपरौन, उमगांव, जयनगर के 5 गांव बेलही, शिलानाथ, दुल्लीपट्टी, उसराही, देवधा, मधवापुर 8 गांव बसबरिया, दुर्गापट्टी, हनुमान नगर, लोमा, महुआ, परसा, राम नगर कजरा, सहार, लदनियां का 1 गांव जोगिया, खुटौना का 4 गांव अनहरबन, बंदरझूली, पिपराही, लछमीपुर लौकही के 6 गांव नारी, थरवाही, हरभंगा, महदेवा, अन्धरामठ, भरफोरी शामिल है।
वाइब्रेंट विलेज-II सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए एक बड़ा अवसर : डीडीसी
डीडीसी ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज-II सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे ग्रामीण जनता की तस्वीर बदलेगी और जीवन स्तर में व्यापक सुधार होगा। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ Convergence मॉडल पर काम करेंगे। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी वाले गांवों में प्राथमिकता से काम होगा। स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर बनाए जाएं ताकि पलायन रुके।
मिथिला पेंटिंग, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत की जाएगा। सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और स्थल निरीक्षण हो, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।



