
MADHUBANI:- घोघरडीहा-मधेपुर में हजारों एकड़ जमीन बनी चौर, सालों भर जलजमाव से किसान तबाह, आंदोलन की चेतावनी
मधुबनी- 09 अक्टूबर। जिले के घोघरडीहा नगर पंचायत और मधेपुर प्रखंड में जलजमाव की समस्या अब आपदा बन गई है। घोघरडीहा नगर पंचायत के वार्ड 1 से 14 के साथ-साथ परसा, कालीपुर, धनखोर, बथनाहा, ब्रह्मपुरा, मधेपुर, भूतहा, बिरौल सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की करीब 15 हजार एकड़ से अधिक उपजाऊ जमीन चौर में तब्दील हो गई है, जहां 12 महीने पानी भरा रहता है।
एक दशक में बर्बाद हुई सोने जैसी जमीन—
मिथिलांचल संघर्ष समिति के अध्यक्ष इं. गौरीशंकर यादव ने बताया कि यह इलाका एक समय धान, गेहूं और मखाना के लिए पूरे बिहार में मशहूर था। लेकिन पिछले एक दशक से जलनिकासी की व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
उन्होंने कहा कि भूतही बलान नदी के पूर्वी और पश्चिमी तटबंध का निर्माण अधूरा है और जो स्लूइस गेट बने हैं, वे सालों से बंद पड़े हैं। बरसात का पानी खेतों में ही फंस जाता है, निकलने का कोई रास्ता नहीं है। परिणाम यह है कि हजारों एकड़ में लगी धान की फसल हर साल डूब जाती है। खेत सूखता ही नहीं, तो गेहूं की बुआई हो ही नहीं पाती। कई जगह तो साल में एक भी फसल नहीं हो पाती।
किसानों पर दोहरी मार—
उन्होंने बताया कि जलजमाव से दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ फसल बर्बाद, दूसरी तरफ जमीन की कीमत आधी रह गई है। कई किसान पलायन को मजबूर हैं। लगातार जलमग्न और जलकुंभी के सिवा कुछ नहीं उगता है।
आंदोलन की चेतावनी—
इं. यादव ने चेतावनी दी है कि यदि दीपावली-छठ से पहले जलनिकासी की पहल नहीं की जाती है तो नवंबर-दिसंबर में मिथलांचल संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों किसानों के साथ घोघरडीहा में अनिश्चितकालीन धरना और जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना को प्राथमिकता पर लागू किया जाए, ताकि जलजमाव वाली जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन, मखाना खेती और बागवानी को बढ़ावा दिया जा सके।



