
MADHUBANI:- 26 साल से नवरात्र में फलाहार पर रहकर मां की आराधना कर रहे ब्रह्मानंद यादव, आस्था और संकल्प की मिसाल
मधुबनी, 12 अक्टूबर। आस्था जब साधना बन जाए तो फलाहार भी तपस्या बन जाता है। फुलपरास के ब्रह्मानंद यादव पिछले 26 वर्षों से शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक एक समय फलाहार पर रहकर पूरी तन्मयता से मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। ब्रह्मानंद बताते हैं कि साल 2000 से नवरात्र व्रत शुरू किया था। तब से हर साल शारदीय नवरात्र में दिन में एक बार ही फल, दूध और जल ग्रहण कर मां की अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती पाठ और संध्या आरती करते हैं। इस दौरान अन्न, नमक का सेवन नहीं करते है।
फलाहार रखकर पूजा से क्या फल मिलता है?
धर्मशास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में नवरात्र में फलाहार व्रत को विशेष महत्व दिया गया है। फलाहार से शरीर हल्का और मन सात्विक रहता है, जिससे साधक का ध्यान भटकता नहीं। कहा जाता है कि अन्न का त्याग करने से राजसिक और तामसिक वृत्तियों पर नियंत्रण होता है और मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इससे मनोकामना सिद्धि, भय और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।
नौ दिन तक हल्का और सात्विक भोजन लेने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर डिटॉक्स होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मौसम परिवर्तन के समय यह व्रत शरीर को संतुलित रखता है।
एक समय भोजन से इंद्रियों पर संयम बढ़ता है, एकाग्रता और आत्मबल मजबूत होता है। ब्रह्मानंद यादव कहते हैं कि मां ने जो दिया, उसी में संतोष है। फलाहार व्रत ने मुझे जीवन में धैर्य और अनुशासन सिखाया है। उनकी यह निरंतर साधना आज क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और संकल्प की मिसाल बन गई है।



