
सरकारी अस्पताल में ड्यूटी की खानापूरी करते हैं चिकित्सक, निजी क्लिनिक पर देते खास ध्यान: विजय यादव
मधुबनी- 29 अगस्त। पूर्व प्रत्याशी व दुर्गा माता मंदिर सेवा ट्रस्ट, रामनगर के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार यादव ने कहा कि बिहार में गरीब लोगों को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने से डर लगता है। अस्पताल का बिल्डिंग, बोर्ड की चमक के बीच अंदर सुविधा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। डॉक्टर सरकारी अस्पताल में ड्यूटी की खानापूरी कर निजी क्लिनिक पर अधिक ध्यान देते है। सरकारी अस्पताल में भले लेट से पहुंचते लेकिन निजी क्लिनिक पर समय पर नजर आते है।
उन्होंने कहा कि अनेको सरकारी अस्पतालों की हालत तो यह है कि मरीज घंटों लाइन में खड़ा रहता है, पर्ची कटाता है, और अंत में पता चलता है डॉक्टर साहब आज हैं ही नहीं। या है भी तो समय हो गया। अब मरीज को नहीं देखेंगे। अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय अस्पतालों में डॉक्टर मरीज को बिना देखे ही यहां सुविधा नहीं होने का बहाना बताकर अन्य अस्पताल रेफर कर देते हैं। इस तरह अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय अस्पतालों का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
उन्होंने जिले के सभी अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय अस्पतालों 24 घंटे इमरजेंसी सर्जरी की व्यवस्था, डिजिटल एक्स-रे मशीन, ऑक्सीजन मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर का पूरा स्टॉक, सभी जरूरी दवाइयों उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि असल में अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय अस्पतालों इस तरह की सुविधा नजर नहीं आ रहा है। सरकारी अस्पतालों की दीवारें पान-गुटखा से लाल-पीली नजर आती हैं। वार्ड में पंखे शोभा की वस्तु बना है। गर्मी में मरीज पसीने से तरबतर होते है। पूछने पर स्टाफ बोलता है अभी ये लाइट खराब हो गया है, अभी पंखा खराब है। सफाई व्यवस्था लचर बनी हैं।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन से डॉक्टरों की 100% उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी और सीसीटीवी निगरानी सरकारी ड्यूटी के समय प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डाक्टर पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हर अस्पताल में साफ-सफाई, 24 घंटे बिजली, पंखा और पीने के पानी की जिम्मेदारी अस्पताल अधीक्षक का होना चाहिए। सरकारी अस्पताल गरीबों का सहारा होता है, लेकिन बिना व्यवस्था गरीबों का समुचित नहीं होता है। जिससे वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराकर कर्ज के बोझ तले दब जाते है।



