
कोलकाता में देश के पहले ‘शब्द संग्रहालय’ का उद्घाटन, अमित शाह बोले- भाषा हमारी संस्कृति और विरासत की पहचान
कोलकाता- 19 जुलाई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में भारत के पहले ‘शब्द संग्रहालय’ (म्यूजियम ऑफ वर्ड) का उद्घाटन किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पुस्तकालय द्वारा विकसित यह संग्रहालय देश की भाषाई विरासत, लिपियों और साहित्यिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी देश की भाषा उसकी संस्कृति, इतिहास और विरासत की पहचान होती है। उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से किसी राष्ट्र की सभ्यता और उसके जीवन मूल्यों को समझा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा के साथ कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा सीखने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भारत की सांस्कृतिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने पुस्तकालयों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि किसी राष्ट्र का भविष्य केवल महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से भी तय होता है कि कितने लोग पुस्तकालयों का उपयोग कर ज्ञान अर्जित करते हैं। पढ़ने की संस्कृति ही समाज को वैचारिक रूप से समृद्ध बनाती है।
अमित शाह ने बंगाल की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने देश को अनेक महान साहित्यकार, वैज्ञानिक, क्रांतिकारी और विद्वान दिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल एक बार फिर देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि वह पिछले नौ महीनों से पश्चिम बंगाल की प्रगति पर नजर रख रहे हैं और राज्य देश का “प्रकाश स्तंभ” बनता जा रहा है। शाह ने राज्य की भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में “सोनार बांग्ला” के निर्माण का संकल्प अवश्य पूरा होगा।
इस संग्रहालय के प्रथम चरण में भारतीय भाषाओं, लिपियों और साहित्य की विविधता को प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय को पारंपरिक प्रदर्शनी स्थल के बजाय एक आधुनिक अनुभवात्मक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहां डिजिटल डिस्प्ले, होलोग्राम, मोशन सेंसर और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से आगंतुक भारतीय भाषाओं के विकास की यात्रा को करीब से देख और महसूस कर सकते हैं।
शब्द संग्रहालय में कुल नौ दीर्घाएं बनाई गई हैं, जो भारतीय भाषाओं के इतिहास, विभिन्न लिपियों, साहित्य और भारतीय सभ्यता पर उनके प्रभाव को दर्शाती हैं। संग्रहालय भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं की समृद्ध विरासत को मौखिक परंपराओं, प्राचीन पांडुलिपियों, मुद्रित साहित्य और आधुनिक डिजिटल माध्यमों तक की यात्रा के साथ प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं को एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नई पीढ़ी के सामने लाना और देश की भाषाई विविधता को संरक्षित एवं लोकप्रिय बनाना है।



