
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब शिक्षकों को जॉइनिंग और बकाया वेतन का इंतजार, नजरे आलम ने शिक्षा मंत्री से की त्वरित पहल की मांग
पटना- 15 सितंबर। ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने बिहार सरकार और शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई 2026 के आदेश के आलोक में अप्रशिक्षित शिक्षकों के मामले में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
नजरे आलम ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करीब एक माह का समय बीत चुका है। ऐसे में शिक्षा विभाग के स्तर से संबंधित शिक्षकों की बहाली एवं जॉइनिंग को लेकर आवश्यक पत्र जल्द जारी किया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से परेशान शिक्षकों और उनके परिवारों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाले ऐसे अप्रशिक्षित शिक्षक, जो पहले से विद्यालयों में कार्यरत थे अथवा जिन्हें सेवा से हटा दिया गया था, उनके मामले में आदेश के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पात्र शिक्षकों को विद्यालय में पुनः योगदान का अवसर दिया जाए। साथ ही वर्षों से लंबित उनके वेतन एवं अन्य देय राशि के भुगतान की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाए।
नजरे आलम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति 7 सितंबर 2026 को शिक्षा विभाग के निदेशक को सचिवालय में उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के निदेशक से अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देकर जल्द विभागीय पत्र जारी कराया जाए।
उन्होंने कहा कि करीब पांच वर्षों से वेतन के इंतजार में रहने वाले इन शिक्षकों की आर्थिक स्थिति काफी कठिन हो गई है। कई परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में सरकार की ओर से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय इन परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी।
नजरे आलम ने कहा कि राज्य सरकार से उम्मीद है कि वह माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए इस मामले में जल्द सकारात्मक पहल करेगी और प्रभावित शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाएगी।



