
आकाश में नजर आया चौठ का चांद, व्रतियों ने चंद्रमा को दिया अर्घ्य,चंद्रदेव की हुई पूजा-अर्चना
मधुबनी – 14 सितंबर। मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था के प्रतीक चौठचंद्र पर्व सोमवार को शहर सहित पूरे जिले में पारंपरिक हर्षोल्लास, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। भादो शुक्ल चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर सुबह से ही घर-घर में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। सुबह से ही घर की महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुट गईं। घर-आंगन की साफ-सफाई, लिपाई-पुताई के बाद पकवान बनाने का दौर शुरू हुआ। रसोई में पूरी, पिरुकिया, खजूर, दाल-पूरी, तरुआ-भुजिया सहित दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की महक से घर-आंगन गुलजार हो उठा।

जैसे-जैसे शाम ढली, व्रती महिलाओं और युवतियों ने सोलह श्रृंगार कर बांस की टोकरी और डालाओं में पकवान, फल-फूल, दही, मिठाइयां और नई फसलों के व्यंजन सजाए और चंद्रदेव के दर्शन की प्रतीक्षा करने लगीं। जैसे ही आकाश में चौठ का चांद नजर आया, चारों ओर “चौठचंद्र भगवान की जय” और “चंद्रदेव महाराज की जय” के जयघोष गूंज उठे। व्रतियों ने विधि-विधान से चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि, संतान के मंगल और अखंड सुहाग की कामना की। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया और सभी ने एक साथ बैठकर पकवानों का आनंद लिया।

चौठचंद्र के कारण दिन भर शहर की मुख्य सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश दुकानें दोपहर बाद तक बंद रहीं और लोग पर्व में व्यस्त रहे। दूसरी ओर त्योहार पर महंगाई का असर भी साफ दिखा। बाजार में दूध की कीमत 60 से 65 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। किराना और सब्जियों के भाव भी आसमान छूते रहे। देसी ओल 150 रुपये किलो, खीरा 40 रुपये किलो और चीनी 70 रुपये किलो तक बिका। नींबू और अमरूद के दाम भी दोगुने हो गए। बावजूद महंगाई के, पर्व की खुशी और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और लोगों ने जमकर खरीदारी की। कुल मिलाकर चौठचंद्र पर्व ने एक बार फिर मिथिला की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपरा और पारिवारिक एकता को जीवंत कर दिया।



