
नेपाल में बाढ़ नहीं, हिमालय की चेतावनी : प्रकृति का श्राप और प्रलय की आहट: पं. शंभूनाथ झा
मधुबनी, 27 अगस्त। नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया है। विज्ञान इसे GLOF यानी हिमनदीय झील फटने की त्रासदी बता रहा है, तो धर्म और ज्योतिष इसे प्रकृति का श्राप और प्रलय की आहट कह रहा है। अंतरराष्ट्रीय फेस रीडर व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा कहते है कि वर्तमान में शनि मीन राशि (जल राशि) में वक्री हैं और राहु का अशुभ प्रभाव है। शनि जल और न्याय के कारक हैं। जब शनि वक्री होते हैं तो जल-प्रलय होता है। पंचांग में पहले से ही उत्तर-पूर्व में जल प्रलय का योग था।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ‘हिमालये चैव वास: शिवस्य’ हिमालय शिव का वास है का उल्लेख मिलता है।
शिव पुराण के अनुसार जब देवभूमि पर मांस-मदिरा, अश्लीलता और लोभ बढ़ता है तो तांडव होता हैं। यह ग्लेशियर का फटना जैसा है। भागवत पुराण में भी कलियुग में अति पाप, लोभ और अति दोहन से जल-प्रलय का वर्णन है।
उन्होंने कहा कि नदियां माता हैं। जब उनमें कचरा, प्लास्टिक और मल गिरेगा, उनका रास्ता रोका जाएगा तो माता रौद्र रूप दिखाएंगी। यह सरकार और मानव समुदाय के लिए भी चेतावनी है। इसका उपाय सिर्फ पूजा नहीं, प्रायश्चित है। पीपल-बरगद का पौधारोपण किया जाना चाहिए। कचरा जलाना बंद करना और पहाड़ों में अनियोजित निर्माण पर रोक ही हिमालय को बचा सकती है। ब्लैक कार्बन बर्फ को काला कर पिघला रहा है। पहाड़ों को कंक्रीट से नहीं, जंगल और धर्म से बचाना होगा।
उन्होंने कहा कि नेपाल की इस आपदा के पीछे पहाड़ों में हो रही अंधाधुंध जंगल कटाई और निर्माण कार्य है। टूरिज्म के नाम पर जंगलों को काटकर, पहाड़ तोड़कर बड़े-बड़े होटल और हाइड्रो प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण संतुलन के खड़े हो रहे हैं। जंगल पहाड़ की जड़ है, जब जड़ ही कट जाएगा तो पहाड़ नहीं टिकेगा। यही ग्लेशियर झीलों को तोड़ रहा है। ग्लेशियर तेजी से पिघला, ऊपर बनी झील टूटने से सारा पानी एक साथ भोटे कोशी नदी में आ गया। बिना बारिश के ही नदी का जलस्तर 15-20 फीट बढ़ गया। पिछले 2-3 साल से जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं।



