
MADHUBANI:- हाईकोर्ट के आदेश,खेसरा 84 पर अतिक्रमण को हटाने को नगर आयुक्त के समक्ष समुचित अभ्यावेदन दाखिल
मधुबनी- 22 अगस्त। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 23/24 में मोमिन टोला, मदरसा चौक से तिलक चौक (जिला केन्द्रीय पुस्तकालय) तक सार्वजनिक सड़क खेसरा संख्या 84 पर अतिक्रमण को हटाने को लेकर दायर जनहित याचिका में बड़ा मोड़ आया है। इस मामले के आवेदक वीरेन्द्र कुमार निधि ने पटना उच्च न्यायालय के दिनांक 14.08.2026 के आदेश (सिविल रिव्यू संख्या 300/2025) के अनुपालन में नगर आयुक्त के समक्ष दिनांक 20.08.2026 को समुचित अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है।
क्या है हाईकोर्ट का नया आदेश?
बता दें कि इस मामले में पहले CWJC No. 14350/2025 में दिनांक 01.11.2025 को कोर्ट ने आवेदक को बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जाने को कहा था।आवेदक ने सिविल रिव्यू 300/2025 दायर कर बताया कि जमीन नगर निगम क्षेत्र में है और बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की संशोधित धारा 435 (2021 संशोधन) के तहत अतिक्रमण हटाने का अधिकार नगर आयुक्त को है। इस पर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दिनांक 14.08.2026 को आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि आवेदक नगर आयुक्त के समक्ष अभ्यावेदन दें और नगर आयुक्त बिहार नगरपालिका अधिनियम की धारा 435 सहित लागू प्रावधानों के तहत विधि-सम्मत कार्रवाई करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी गई है, सक्षम नगर प्राधिकारी स्वतंत्र निर्णय लें।
नगर क्षेत्र की भूमि से अतिक्रमण हटाना नगर निकाय का दायित्व—
बतादें कि आवेदक वीरेन्द्र कुमार निधि ने अपने अभ्यावेदन में कहा है कि नगर विकास विभाग का पत्रांक 05/1633 दिनांक 08.04.2021 पहले ही स्पष्ट करता है कि नगर क्षेत्र की भूमि से अतिक्रमण हटाना नगर निकाय का दायित्व है। नगर निगम ने खुद अमीन से मापी कराई, खेसरा 84 पर 19 व्यक्तियों का अतिक्रमण पाया और 02.09.2025 को 19 नोटिस (संख्या 153, 157, 158, 159, 160, 161, 163, 164, 165, 166, 167, 168, 169, 170 आदि) जारी किए थे। कार्रवाई वहीं रुकी हुई है। अब संशोधित धारा 435, विभागीय पत्र 08.04.2021 और हाईकोर्ट के आदेश 14.08.2026 के आलोक में मामला किसी अन्य अधिकारी के पास भेजने का आधार शेष नहीं है। दायित्व नगर आयुक्त का है।
अतिक्रमण खाली और अर्थदंड देय राशि की वसूली प्रावधान—
बता दें कि खेसरा 84 की अमीन मापी-रिपोर्ट, नक्शा, पूर्व के 19 नोटिसों और सुनवाई के आधार पर आठ सप्ताह के भीतर निष्पक्ष, तर्कसंगत आदेश पारित कर स्थायी-अस्थायी अतिक्रमण हटाया जाए और अर्थदंड देय राशि की वसूली की जाए। अभ्यावेदन के साथ हाईकोर्ट के दोनों आदेश, विभागीय पत्र और अतिक्रमित सड़क की फोटो भी संलग्न की गई है। प्रतिलिपि जिलाधिकारी, मधुबनी को भी दी गई है।



