
मिथिला में आज भी पंडितों द्वारा यजमानों को रक्षासूत्र बांधने की प्राचीन परंपरा जीवंत: पं. शंभूनाथ झा
मधुबनी- 23 अगस्त। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के त्योहार तक सीमित नहीं है। मिथिला में आज भी पंडितों द्वारा यजमानों को रक्षासूत्र बांधने की सदियों पुरानी परम्परा जीवंत है। विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा बताते हैं कि भविष्य पुराण में भी इसका उल्लेख है। जब इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था तो असुरों पर विजय मिली थी। तभी से ब्राह्मणों द्वारा रक्षासूत्र बांधने की परम्परा चली आ रही है। यह मिथिला में आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जा रही है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही मिथिला के गांव-गांव में पंडित अपने यजमानों के घर पहुंचते हैं।
वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यजमान की कलाई पर रूई से तैयार विशेष रक्षासूत्र बांधते हैं। मान्यता है कि पंडित जी यजमान की दीर्घायु,सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए यह सूत्र बांधते हैं। बदले में यजमान पंडित को अन्न, वस्त्र और दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेते हैं। यह परम्परा पंडित-यजमान के अटूट संबंध का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मिथिला की महिलाएं इस दिन अपने घर के पूजा घर में स्थापित देवी-देवताओं की तस्वीर और तुलसी के पौधे पर रक्षासूत्र अर्पित करती हैं। इसके बाद ही भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं।



