
ज्योतिष विद्या समय के चक्र को समझने में करता मदद, बाधाओं को कम करने में सहायक : अन्नु झा
मधुबनी – 28 जुलाई। शहर के मंगरौनी हार्ट हास्पिटल स्थित ‘भारतीय ज्योतिष शास्त्र का उद्भव और आधुनिक युग में इसका महत्व’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। संस्कार संस्कृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में परिचर्चा को संबोधित करते हुए हस्तरेखा में विशारद, ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार अन्नु झा ने कहा कि ज्योतिष विद्या समय के चक्र को समझने में मदद करता है। व्यक्ति को ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं से जोड़ता है। जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है।
ज्योतिष विद्या आकाश में स्थित ग्रहों, नक्षत्रों और खगोलीय पिंडों की स्थिति का अध्ययन कर मानव जीवन पर उनके प्रभावों का विश्लेषण और होने वाली समस्याओं का समाधान करने वाली प्राचीन विद्या है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विज्ञान मानव जीवन पर पड़ने वाले वर्तमान और भविष्य का पूर्वानुमान लगाने, आत्म-ज्ञान, करियर मार्गदर्शन, स्वास्थ्य सुधार, और चुनौतियों से निपटने के लिए कर्म-आधारित समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ज्योतिष जन्मकुंडली के माध्यम से लोगों की ताकत, कमजोरियों और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करता है। ज्योतिष विद्या को करियर बनाकर लोगों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष विद्या एक ‘प्रकाश-विज्ञान’ की तरह है। यह जीवन में अनिश्चितताओं को दूरकर व्यक्ति का मार्गदर्शन और बेहतर भविष्य का अवसर प्रदान करती है। परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर व ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने कहा कि ज्योतिष ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार लाने का महत्वपूर्ण उपाय होता है। वास्तुदोष से तरह-तरह की समस्या उत्पन्न होती रहती है। बीमारियों और जीवन की बाधाओं को कम करने में वास्तु शास्त्र सहायता करता है।
ज्योतिष का उद्देश्य केवल भाग्य बताना नहीं, बल्कि कर्मयोगी बनाने पर जोर देना है। सही कर्म ही सुखद भविष्य बनाता है। परिचर्चा को रमण कुमार झा, हेमंत मिश्र, भोला ठाकुर, ललन झा, राजीव राय सहित अन्य ने संबोधित किया।



