
सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म मीशो पर मिथिला पेंटिंग्स की छटा बिखेर रही साड़ियों की बढी डिमांड
“मीशो से जुड़ी मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड के रांटी गांव की रेखा पासवान छह माह से अपनी कलाकृतियों मीशो को आपूर्ति कर रही है। मीशो की डिमांड के अनुसार मिथिला पेंटिंग्स वाले साडी, सूट तैयार करती है। इस कार्य में उनके साथ रांटी की प्रियंका कुमारी, विनिता देवी, मुन्नी देवी,रंजू देवी,अनिता देवी, अमेरिका देवी, शालो देवी, गिरिजा देवी सहित 25 से 30 महिलाएं जुड़ी है
मधुबनी- 08 मई। सोशल कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म मीशो मिथिला पेंटिंग्स कलाकारों की कलाकृतियां की बिक्री में कारगर साबित हो रहा है। मीशो से जुड़ी मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड के रांटी गांव की रेखा पासवान करीब छह माह से अपनी कलाकृतियों को मीशो को आपूर्ति कर रही है। रेखा पासवान ने बताया कि मीशो द्वारा मांग के अनुसार मिथिला पेंटिंग्स वाले साडी, सूट और अन्य कलाकृतियां तैयार करते है। इस कार्य में उनके साथ रांटी की प्रियंका कुमारी, विनिता देवी, मुन्नी देवी, रंजू देवी, अनिता देवी, अमेरिका देवी, शालो देवी, गिरिजा देवी सहित 25 से 30 महिलाएं कार्य करती है। रेखा पासवान मिथिला पेंटिंग कलाकार और प्रशिक्षक हैं। वह कई चुनौतियों से लड़कर इस कला में अपनी पहचान बनाई है। अब वह अन्य महिलाओं को इस हुनर में प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध करा रही है।
रेखा पासवान का उद्देश्य अपनी जैसी अन्य महिलाओं को मिथिला पेंटिंग्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। रांटी के कलाकार पारंपरिक मिथिला कला को जीवित रखने के साथ-साथ अब इसका व्यावसायिक उपयोग भी कर रहे हैं। साड़ियाँ, सूट, पाग, दोपटा, हैंडबैग और अन्य घरेलू व सजावटी सामान का उत्पादन करते हुए 15 से 20 हजार रुपये तक की प्रतिमाह आमदनी कर रहे हैं। बता दें कि रांटी गांव के 100 से अधिक कलाकार मिथिला पेंटिंग को आजीविका बना चुके है। साल 2011 में इसी गांव की महासुंदरी देवी को मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में पद्मश्री मिलने के बाद गांव की तस्वीर बदलने लगी। 2019 में इसी गांव की गोदावरी दत्त को भी पद्मश्री मिला और 2021 में इसी गांव की दुलारी देवी को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया। इस गांव की 100 से अधिक महिलाएं मिथिला पेंटिंग से जुड़ चुके हैं। इस पारंपरिक कला के बदौलत आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।



