बिहार

MADHUBANI:- सौराठ में अयुथ चंडी महायज्ञ के मंत्रों का उच्चारण चहुंओर हो रहा गुंजायमान, उमड़ रहे श्रद्धालु

मधुबनी- 06 मई। जिले के सौराठ स्थित चल रहे अयुथ चंडी महायज्ञ के वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा आहुतिया देने का क्रम जारी है। 9 मई तक चलने वाला अयुथ चंडी महायज्ञ के यज्ञशाला की परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है।महायज्ञ के दौरान मंत्रों का उच्चारण आसपास के इलाका को गुंजायमान कर रहा है। महायज्ञ के आयोजन मंडल में शामिल प्रफुलचंद्र झा ने बताया कि जिस प्रकार शरीर को अन्न की जरूरत होती है उसी तरह पर्यावरण शुद्ध रखने के लिए यज्ञ आवश्यक है। यज्ञशाला केतट धुएं लाभदायक है।

वैदिक रीति से किए यज्ञ से वातावरण प्रदूषणमुक्त होनेठ के साथ-साथ हमारी चेतना भी पुष्ट होती है। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक भी कर रहे हैं। यज्ञ के लिए आम की लकड़ी का प्रयोग किया जा रहा है। तिल, चावल, जौ, लोबान व अन्य प्रकार की औषधीय वनस्पति से तैयार हवन सामग्री से आहुतियां दी जा रही हैं। यज्ञ का पवित्र धूम्र ओजोन परत को मजबूत करता है। ओजोन परत ही सूर्य से निकलने वाली घातक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। हवन सामग्री अग्नि में जलकर कई गुना प्रभावकारी हो जाती है। अगर एक चम्मच देशी घी का प्रयोग हवन में करें तो मानव और पर्यावरण के लिए कई गुना लाभदायक होता है। वहीं, यज्ञ स्थल पर पहुंचे संजीव कुमार मिश्र ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का एक पवित्र और वैज्ञानिक अनुष्ठान है। यहभ धार्मिक बल्कि शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है। यह वायुमंडल को शुद्ध करने, रोगाणुओं को नष्ट करने, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने, मानसिक शांति प्रदान करने और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है।

यज्ञ में इस्तेमाल होने वाली सामग्री (घी, जड़ी-बूटियाँ) अग्नि के माध्यम से सूक्ष्म होकर हवा में फैलती है, जिससे वायु शुद्ध होती है और हानिकारक बैक्टीरिया व वायरस नष्ट होते हैं। यज्ञ के दौरान मंत्रों का उच्चारण और पवित्र धुआं मन को शांत करता है, मानसिक तनाव कम करता है। यज्ञ को ईश्वर की पूजा और आत्मा की शुद्धि का माध्यम माना जाता है। इससे साधक की आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। यज्ञ सामाजिक समृद्धि और प्रकृति के संतुलन के लिए फलदायी है। घर में यज्ञ या हवन करने से नकारात्मक शक्तियों और वास्तु दोष से मुक्ति मिलती है। यज्ञ की अग्नि में आहुति से सुगंध चिकित्सा होती है। मंत्रों के जाप से ध्वनि चिकित्सा का लाभ मिलता है।

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