
चीन के बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किए जाएंगे मधुबनी के पं. शंभूनाथ झा
“फेस रीडिंग विद्या की उत्पति भारत में हुई है। भारत के अलावा चीन, जापान, अमेरिका सहित अन्य देशों में फेस रीडिंग विद्या को माना है। फेस रीडिंग आयुर्वेद और वैदिक ज्योतिष सहित कई आध्यात्मिक प्रथाओं और दर्शन के आधार पर काम करता है”
मधुबनी – 07 मई। फेस रीडिंग के क्षेत्र में प्रसिद्ध मधुबनी के पंडित शंभूनाथ झा को चीन की राजधानी बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इसकी जानकारी देते हुए पंडित शंभूनाथ झा ने बताया कि यह अवार्ड मई के अंतिम सप्ताह में एक संस्थान द्वारा प्रदान किया जाएगा। पं. शंभूनाथ झा ने बताया कि आधुनिक युग में फेस रीडिंग के महत्व को समझना होगा। कंपटीशन की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए फेस रीडिंग उनके जीवन के लिए बड़ा महत्व रखता है। विभिन्न कंपटीशन की तैयारी करने वाले युवा फेस रीडिंग के माध्यम से बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। कंपटीशन की तैयारी दौरान ग्रहों की दशा और उसके नकारात्मक असर को कम करने का उपाय किया जा सकता है। आने वाली उलझन को दूर किया जा सकता है। इस विद्या के जरिए व्यक्ति के चेहरे का आंकलन कर उसके जीवन में पूर्व की और भविष्य की घटनाओं को आसानी से समझा जा सकता है। फेस रीडिंग से मिलने वाले संकेतों से व्यक्ति के जीवन में अप्रत्याशित बदलाव का सहज ढंग से आंकलन किया जा सकता है। इस विद्या से युवाओं में आ रहे तनाव को दूर किया जा सकता है। बेहतर पठन-पाठन और भविष्य की कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।
पं. झा ने बताया कि आधुनिक युग में फेस रीडिंग की प्रासंगिकता और महत्व और बढ़ जाता है। फेस रीडिंग विद्या और उसके महत्व की खोज की तेजी से होने लगी है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा इसका लाभ उठाते थे। अब यह विद्या विशिष्ट लोगों को भविष्य के लिए तैयार रहने में मदद करती है। चेहरा व्यक्तित्व को सामने लाता है। चेहरे की विशेषताओं और व्यक्तित्व के बीच एक मजबूत संबंध है। फेस रीडिंग से व्यक्तित्व क्षमताओं को समझने में सुविधा होती है। व्यक्ति भाग्य के बारे में जानकरी उपलब्ध कराता है। फेस रीडिंग व्यक्ति के चेहरे की संरचना, विशेषताओं और अभिव्यक्तियों पर आधारित प्राचीन विद्या है। व्यक्ति के व्यवहार के बारे में गहराई से जानने के लिए फेस रीडिंग सबसे बेहतर उपाय है। फेस रीडिंग प्राचीन प्रथा है। यह चेहरे की विशेषताओं से व्यक्ति के भाग्य की जानकारी प्राप्त किया जा सकता है। फेस रीडिंग विद्या की उत्पति भारत में हुई है।
भारत के अलावा चीन,जापान,अमेरिका सहित अन्य देशों में फेस रीडिंग विद्या को माना है।फेस रीडिंग आयुर्वेद और वैदिक ज्योतिष सहित कई आध्यात्मिक प्रथाओं और दर्शन के आधार पर काम करता है। इसमें चेहरे के आकार, रंग, बनावट से स्वभाव, मनोवृत्ति क्षमता, चरित्र, व्यक्तित्व की जानकारी प्राप्त किया जा सकता है। पं. झा ने बताया कि फेस रीडिंग का उल्लेख सनातन धर्म शास्त्र में विस्तृत रूप से मिलता है। इसके माध्यम से व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य और भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है। चेहरे की बनावट, व्यक्ति स्वभाव और भाग्य के संबंध में सटीक संकेत दिया जा सकती है। गरुड़ पुराण में भी फेस रीडिंग का उल्लेख मिलता है। चेहरे की बनावट के जरिए इंसान के भूत-भविष्य और स्वभाव के बारे में जाना जा सकता है। चेहरा पढ़कर भाग्य बताना सामुद्रिक शास्त्र का एक अंग है। व्यक्ति की आर्थिक संपन्नता, उसकी व्यवसाय में सफलता या असफलता, स्वभाव के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। फेस रीडिंग में ग्रहों दशाओं का अध्ययन किया जाता है, ताकि यह देखा जा सके कि वे कैसे व्यक्ति को प्रभावित करती हैं।यह व्यकि के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिकी भविष्यवाणी करती है। संकट के बारे में संकेत देने के लिए भी किया जाता है।



