
MADHUBANI: खाद की कमी से किसानों में मायूसी,लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र में हो रही है कालाबाजारी
मधुबनी-02 दिसंबर। गेहूं की बुआई के मौसम में खाद की कमी से किसान मायूस हैं। इस समय डीएपी,यूरिया एवं पोटाश की जरूरत होती है। परंतू नवंबर के आधे भाग से ही दुकानों से खाद मिलना बंद हो चुका है। रोज दुकानों के चक्कर लगा-लगाकर किसान परेशान हो चुके हैं। बुआई के लिए खेत तैयार होने के बावजूद मधुबनी जिले के किसानों को खाद नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
पारस कंपनी का डीएपी एवं आईपीएल का यूरिया एवं पोटाश बेहतर माना जाता है। परंतू इन खादों के उपलब्ध नहीं रहने से किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। उधर खाद की कालाबाजारी की भी चर्चा है। बताते हैं कि पारस का 1200 रुपये प्रति बोरा का डीएपी कालाबाजार में 2000 रुपये या अधिक दर पर,600 रुपए प्रति बोरा का पोटाश 1150 रुपए और 260 रुपये प्रति बोरा का यूरिया 400 से 450 रुपये प्रति बोरा की दर से बिक रहा है। इसके अलावा नकली खाद की बिक्री की भी अपुष्ट जानकारी आ रही है। परिस्थिति के अनुसार नकली खाद की बिक्री संभव है।
माकपा जिला कमिटी सदस्य एवं खेमयू नेता उमेश घोष इस परिस्थिति के लिए व्यापारियों एवं अधिकारियों को जिम्मेवार मानते हैं। वे बताते हैं कि उनके द्वारा खरीफ एवं रबी बुआई के मौसम हर वर्ष इसी तरह की स्थिति बना दी जाती है। इससे कालाबाजारी करनेवाले व्यापारी मालामाल होते रहते हैं जबकि किसान तंगहाल होते रहते हैं। नहरी पंचायत पूर्व मुखिया चन्द्र किशोर सल्हैता एवं शंभू सल्हैता के अनुसार खाद की कमी के कारण किसान बुआई नहीं कर पा रहे हैं। खुटौना प्रखंड क्षेत्र के दुर्गीपट्टी निवासी किसुन मंडल एवं नारायणपुर के नारायण यादव बताते हैं कि किसान अब गेहूं की खेती छोड़ने की सोच रहे हैं,क्योंकि प्रखड में खाद खरीदकर खेती करने से कोर्ट फायदा नहीं है। परंतू खुटौना प्रखंड के प्रभारी बीएओ शौकत अली एक सप्ताह में खाद का रैक लग जाने से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद करते हैं।



