बिहार के चर्चित DTO घोटाले में बड़ा फैसला: पटना के पूर्व DTO अजय ठाकुर को ‘एक वेतन वृद्धि रोक’ की सजा
पटना – 31 अक्टूबर। बिहार के परिवहन विभाग के चर्चित BS-III, BS-IV फर्जी रजिस्ट्रेशन घोटाले में बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। पटना के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी और वर्तमान में अपर समाहर्ता, अररिया अजय कुमार ठाकुर (बि०प्र०से०, कोटि- 161/19) के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोप जांच में प्रमाणित पाए गए हैं। सरकार ने उन्हें एक वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने की सजा सुनाई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी संकल्प के अनुसार मामला 2019-20 का है।
क्या था पूरा घोटाला?
जब अजय ठाकुर पटना में DTO थे, तब उनके कार्यालय में लिपिक/प्रोग्रामर/डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा केंद्र सरकार के आदेशों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित BS-III और BS-IV वाहनों का बैकलॉग एंट्री कर अवैध निबंधन किया गया। आरोप है कि ठाकुर की अपनी लॉगिन ID से 05 वाहनों की बैकलॉग एंट्री और 547 वाहनों को Approval दिया गया। इसमें फर्जी मनी रसीद का इस्तेमाल हुआ, जिससे सरकार के राजस्व को भारी नुकसान हुआ। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट दिनांक 26.05.2026 में दोनों आरोप प्रमाणित पाए गए।
ठाकुर ने अपने बचाव में चार दलीलें दी थीं:
1. VAHAN सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामियां थीं।
2. सिस्टम हैक हुआ था, IP की जांच नहीं हुई।
3. उस समय OTP का सिस्टम नहीं था।
4. प्रोग्रामर ने गड़बड़ी की सूचना नहीं दी।
जांच अधिकारी ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब अनुमान और बचने के बहाने हैं। लॉगिन ID आपके प्रशासनिक नियंत्रण में था। अगर आपके अधीनस्थ आपके ID का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, तो यह गंभीर प्रशासनिक शिथिलता और कर्तव्यहीनता है। कार्यालय प्रमुख होने के नाते पर्यवेक्षण करना आपका काम था। सरकार ने उनके लिखित अभिकथन को अस्वीकृत करते हुए दंड विनिश्चय किया है।
बताया जा रहा है कि पटना DTO कार्यालय में सैकड़ों BS-III वाहनों को फर्जी तरीके से BS-IV दिखाकर रजिस्टर किया गया था, जो सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बाद भी किया गया था।



