
कोजागरा पर महिलाओं के मंगलगान से गूंज उठा मिथिलांचल, चुमावन और पचीसी ने बढ़ाई रौनक
मधुबनी- 25 अक्टूबर। लोक आस्था और मधुर संबंधों का प्रतीक मिथिला का अनुपम लोकपर्व कोजागरा रविवार संध्या को पूरे मिथिलांचल में पारंपरिक उल्लास और धूमधाम से मनाया गया। जिले के बसौली गांव में यह उत्सव खास आकर्षण का केंद्र रहा।
बसौली के टेकनाथ पाठक के घर-आंगन में दिनभर गहमागहमी रही। उनके पुत्र दीपक पाठक की शादी के बाद यह पहली कोजागरा थी, इसलिए उत्सव का रंग सबसे गहरा दिखा। घर की महिलाओं ने आंगन को आकर्षक अष्टदल अरिपन (अल्पना) से सजाया और मंगलगान के मधुर स्वरों के बीच नवविवाहित वर का पारंपरिक चुमावन किया। बड़े-बुजुर्गों ने दूर्वा-अक्षत देकर सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।

चुमावन के बाद का दृशय और भी मनोहारी हो गया, जब वर ने हंसी-ठिठोली के बीच चांदी की कौड़ी से पचीसी खेली। देर रात तक मैथिली लोकगीत-संगीत की महफिल सजी रही और लोग एक-दूसरे के यहां जाकर मखान, पान और मिठाई ग्रहण करते रहे।
इस अवसर पर आयोजित महफिल में पं. ज्योतिषाचार्य सतीश कुमार झा, शंभू कुमार झा, प्रदीप कुमार झा, हरेकृष्ण झा, प्रशांत कुमार झा, सुनील कुमार, शैलेन्द्र मिश्रा, राधेश्याम झा, सतीश चंद्र झा, विजय कुमार झा, गोकुल पाठक, अमित मिश्रा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कन्या पक्ष से आए भार ने परंपरा में चार चांद लगा दिए। लगभग तीन से छह फुट व्यास वाले बांस के डाला पर सजाकर लाए गए धान, मखान, पांच प्रकार की मिठाइयां, नारियल, केला, दही, पान की ढोली, मखाना की माला, जनेऊ, सुपारी, इलायची और वर के लिए छाता, छड़ी, वस्त्र सहित अन्य शुभ सामग्री आकर्षण का केंद्र रही। चुमावन के बाद आगंतुक स्वजनों के बीच मखान-पान व मिष्टान का वितरण किया गया और सभी को चूड़ा-दही, मिठाई, केला का भोजन कराया गया।
वहीं, जिन घरो में नवविवाहित वर नहीं थे, वहां कुलदेवता-कुलदेवी और माता लक्ष्मी की पूजा की गई। बुजुर्ग महिलाओं ने परंपरा के अनुसार भगवती घर किया। पं. ज्योतिषाचार्य सतीश कुमार झा ने बताया कि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल पूजा नहीं, बल्कि मिथिला की सभ्यता, रिश्तों की मिठास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है।



